Breaking News
recent

कड़े नियमों के बावजूद सरकारी आवासों पर धड़ल्ले से हो रहे कब्जे,पाकिस्तान सीमा से सटे थाना क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था में चूक खतरनाक

जैसलमेर. सीमावर्ती जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ सहित आठ थाना क्षेत्र ऐसे हैं, जहां जाने के लिए बाहरी व्यक्ति ही नहीं जिलावासियों को भी कायदे से पूर्वानुमति की जरूरत होती है लेकिन वास्तविकता यह है कि इन नियमों की पालना करवाने वाले जिम्मेदार ही गंभीरता नहीं दिखा रहे। नतीजा यह कि मोहनगढ़ नहरी कस्बे में सरकारी आवासों में बाहरी लोग अवैध रूप से न केवल बस चुके हैं बल्कि नियमों को ठेंगा बताते हुए जल-बिजली का भी उपभोग कर रहे हैं। पाकिस्तान सीमा से सटे थाना क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था में चूक खतरे की घंटी बजा रही है। सरहदी गांवों के साथ-साथ विस्तृत नहरी क्षेत्र में संदिग्धों की आवाजाही तथा आकर बस जाने से सुरक्षा के लिहाज से भी खतरे का अलार्म बज चुका है। चिंतनीय तथ्य यह है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के बावजूद राज्य सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है, यही नहीं जिले के जनप्रतिनिधि भी इसको लेकर अब तक सक्रिय नहीं हुए हैं। उधर, पुलिस तंत्र में जरूरत के मुताबिक जितनी नफरी चाहिए, उससे काफी कम है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस महकमे को अपनी ड्यूटी करने में कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही है।

विस्तृत क्षेत्र, छितरी आबादी
नहरी क्षेत्र की उपनिवेशन तहसीलों की छितराई हुई चक आबादियों में भी अनजान लोगों की ज्यादा तादाद और अवैध वाहनों की भरमार है। इन क्षेत्रों में बिना नंबरी चार-पहिया वाहन व मोटर साइकिलें दौड़ती देखे जा सकते हंै। अंदेशा यह भी है कि इन वाहनों में से कई वाहन चोरी के भी हो सकते हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नहर के आसपास बसी चक आबादियां में संदिग्धों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा चक्र मजबूत करने की दरकार है। पुलिस प्रशासन की मानें तो चक आबादियों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी उन्हें है और यहां दौड़ रहे अवैध वाहनों की बात भी वे स्वीकारते हैं। गौरतलब है कि विगत वर्षों में हेरोइन व हथियारों की बरामदगी हो चुकी है, वहीं पाक जासूसों की गिरफ्तारियां हुई है। उधर, नाचना, मोहनगढ़ और रामगढ़ तीनों थानों के साथ-साथ चंद पुलिस चौकियां इस क्षेत्र में है।
हकीकत यह भी
विषम भौगोलिक परिस्थितियों के साथ विशाल रूप से फैले नहरी क्षेत्र में कृषि, मजदूरी व पशुपालन व्यवसाय से जुड़े लोग यहां निवास करते हैं। साथ ही नियमों से बेपरवाह यहां सैकड़ों लोग प्रतिबंधित होने के बाद भी इन क्षेत्रों में हर दिन आवाजाही कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार जैसलमेर पुलिस महकमे में जहां नफरी की कमी है, वहीं वाहनों के संचालन व संधारण के लिए मिलने वाला बजट भी कम है। ऐसे में पुलिस महकमे को अपराधियों को पकडऩे में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
ये बंदोबस्त होना जरूरी
- चक आबादियां, जो उपनिवेशन तहसीलों में बसी है, वहां सामयिक रूप से हो सघन जांच अभियान
- पुलिस की यहां रात्रि गश्त व्यवस्था और जांच अभियान को प्रभावी बनाने की दरकार
-नहरी क्षेत्रों में अवैध वाहनों की तलाशी के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत
-छितरी व सघन रूप से बसी बस्तियों में हर व्यक्ति का सत्यापन किया जाना आवश्यक
प्रतिबंध का बंधन
-क्रिमिनल संशोधन एक्ट 1996 के तहत अधिसूचित थाना क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए अनुमति लेना जरूरी
-जैसलमेर में 2008 में बार्डर को बेचने के मामले के बाद इस कानून को बनाया गया है सख्त
-बिना परमिशन मिलने पर व्यक्ति के खिलाफ पुलिस हो कार्रवाई का अधिकार
-प्रतिबंधित थाना क्षेत्रों में प्रवेश के लिए वैधानिक अनुमति जरुरी है।
-प्रतिबंधित क्षेत्र में जैसलमेर जिले के आठ थाना क्षेत्रों के करीब 350 गांव शामिल
-एसडीएम, संबंधित थाना, पुलिस अधीक्षक व तहसीलदार से सत्यापन के बाद मिलती है अनुमति

फैक्ट फाइल-
-38 हजार वर्ग किमी से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है सरहदी जिला
-8 थाना क्षेत्र प्रतिबंधित किए गए हैं जैसलमेर जिले में सुरक्षा के लिहाज से
-350 के करीब गांव जिले के ऐसे हैं, जहां जाने के लिए जरूरी है अनुमति
-470 किमी की लंबाई में फैली है जैसलमेर जिले की सीमा



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.