बांदीकुई. सरकार की ओर से केन्द्रीयकृत व्यवस्था के तहत मिड डे मील योजना में 1 नवम्बर से विद्यालयों में दाल की सप्लाई किए जाने के आदेश की पालना नहीं हो रही है। प्रशासन की अनदेखी के चलते दो माह से दाल का उठाव नहीं होने से एफसीआई में रखी हुई है। मजबूरन बाजार से दाल खरीदकर विद्यालयों में पोषाहार बनाया जा रहा है। उठाव नहीं होने के पीछे कारण बताया जा रहा है कि रसद विभाग द्वारा आरोह आदेश जारी नहीं किया गया। इससे दाल का परिवहन नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार मिड डे मील योजना के तहत 1 नवम्बर से गेहंू व चावल की तर्ज पर दाल भी मुहैया कराए जाने के आदेश जारी कर दिए गए। इसी कड़ी में सरकार की ओर से दाल की सप्लाई भी कर दी गई। जांच कमेटी की ओर से सैम्पल लेकर जांच भी करा ली गई। इसमें दाल गुणवत्तायुक्त पाए जाने पर अक्टूबर माह में दाल को भारतीय खाद्य निगम कार्यालय में रखवा दिया, लेकिन इसके बाद प्रशासन सप्लाई करना ही भूल गया।
जिले में सवा लाख बच्चे हो रहे हैं लाभान्वित
सूत्रों के मुताबिक दौसा जिले में संचालित 1800 विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत करीब 1 लाख 31 हजार छात्रों को पोषाहार में दाल दिया जाना तय है। इसमें दौसा में 19 हजार 91, बांदीकुई 21 हजार 498, महुवा 19 हजार 524, सिकराय 22 हजार 198, लालसोट 35 हजार 21 एवं लवाण में 13 हजार 733 छात्र योजना के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। इसमें कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को दाल 20 ग्राम व पत्तीदार सब्जियों सहित 50 ग्राम, कक्षा 6 से 8 तक दाल 30 ग्राम, पत्तीदार सब्जियों सहित 75 ग्राम देय है।
कमेटी करती है गुणवत्ता की जांच
सम्बंधित एजेंसी की ओर से दाल की सप्लाई किए जाने के बाद गुणवत्ता जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की गई है। इसमेंं मुख्य समन्वयक शिक्षा अधिकारी लालसोट सीताराम शर्मा, सिकराय अनिता अग्रवाल, बांदीकुई संपतराम मीणा,, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भांवता-भांवती प्रधानाचार्य बाबूलाल गुर्जर को शामिल किया। जिन्होंने चना, मूंग एवं उड़द की दाल की जांच भी कर रिपोर्ट भेज दी है।
ये है जांच प्रक्रिया
मिड डे मील योजना के तहत नेफेड से आपूर्ति की जाने वाली दालों की गुणवत्ता की जांच दो स्तरों पर होती है। इसमें दाल मिल्स पर गुणवत्ता की जांच नेबल एक्रीडीटेड प्रयोगशाला या फिर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच की जाती है। सम्बंधित प्रयोगशाला द्वारा एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के मापदण्डों के अनुसार दाल की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद दालों को एफसीआई गोदाम तक पहुंचाया जाएगा।
एफसीआई गोदाम दाल पहुंचाने वाले प्रत्येक वाहन के चालक को प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट साथ देकर भेजा जाता है। जहां शिक्षा विभागीय अधिकारी एवं खाद्य निगम के अधिकारी दालों का मिलान सैम्पल से करेंगे। मिलान सही पाए जाने पर ही दाल गोदाम में रखवाई जाती है। इसके बाद ही विद्यालयों में सप्लाई की जाती है। (नि.सं.)
आरोह के अभाव में नहीं हुई दाल सप्लाई
रसद विभाग की ओर से परिवहन के लिए आरोह जारी नहीं करने से दाल का परिवहन नहीं हो सका। ऐसे में बाजार से दाल खरीदकर बच्चों को पोषाहार में दी जा रही है। दाल का भुगतान सरकार की ओर से कर दिया जाएगा। आदेश जारी होने पर शीघ्र परिवहन कर दाल सप्लाई करवा दी जाएगी।
सम्पतराम मीणा, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बांदीकुई





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