सुरों से संभाली विरासत
दो दिवसीय गुणीजन संगीत समारोह सम्पन्न, कलाकारों ने दी गायन-वादन की प्रस्तुति, उस्ताद डागर और सुधीर माथुर सहित कलाकारों को मिला सम्मान
जयपुर
वरिष्ठ सांस्कृतिक पत्रकार व कला समीक्षक श्रीगोपाल पुरोहित व वरिष्ठ कलाकार पं.गोकुल चंद्र राव की स्मृति में आयोजित ३६वें अखिल भारतीय गुणीजन संगीत एवं सम्मान समारोह के आखिरी दिन सितार वादन और ध्रुवपद गायन के स्वरों ने श्रोताओं को अपने मोहपाश में बांध लिया। सबरंग संस्थान और कलानेरी आर्ट गैलेरी की ओर से आयोजित समारोह के दूसरे दिन युवा सितार वादक मोहम्मद इरफान ने अपने गुरुओं के सबक को सितार वादन में पिरोया। उन्होंने राग रागेश्वरी को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। इसमें उन्होंने आलाप, जोड़ और झाले को पेशकर तालियां बटोरीं। करीब एक घंटे की प्रस्तुति के तहत मोहम्मद इरफान ने सितार पर गायिकी अंग को भी दर्शाने का प्रयास किया। उनके साथ तबले पर मोहम्मद शोएब ने संगत की।
इनको मिला सम्मान
इस मौके पर वरिष्ठ ध्रुवपद गायक पद्मश्री उस्ताद वासिफउद्दीन खान डागर को ध्रुवपद गायिकी की सेवाओं के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और समाजसेवी सुधीर माथुर को समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नवाजा गया। उन्हें सम्मान स्वरूप स्मृति चिहृ, प्रमाण पत्र, शॉल, श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
जुगलबंदी से साधे ध्रुवपद के स्वर
कार्यक्रम के दूसरे चरण में वरिष्ठ ध्रुवपद गायक पद्मश्री उस्ताद वासिफउद्दीन खान डागर के शिष्य अरमान अली और शिवम भारद्वाज ने जुगलबंदी का प्रदर्शन करते हुए ध्रुवपद के स्वरों को साधा। कार्यक्रम के दौरान दोनों ही कलाकारों ने शुरुआत में राग यमन को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। इस राग में आलापचारी के बाद राग के सौन्दर्य को रचना के माध्यम से जाहिर करने का खूबसूरत प्रयास किया। बाद में राग केदारा में अपने गुरु वासिफउद्दीन खान डागर की शख्सियत पर आधारित रचना 'गमक के शहंशाह उस्ताद डागर...,Ó को पेशकर सुर, लय और ताल का प्रदर्शन किया। अंत में राग मालकौंस के माध्यम से अपने गायन को विराम दिया। उनके साथ पखावज पर छवि शर्मा और तानपुरे पर रहमान हरफनमौला ने संगत की। इससे पूर्व कलानेरी आर्ट गैलेरी के विजय शर्मा और सौम्या शर्मा ने कलाकारों का स्वागत किया। सबरंग संस्था सचिव राजेंद्र राव ने सभी का आभार व्यक्त किया।





No comments:
Post a Comment