जोगेंद्र सिंह गौड़/सीकर.
एक बेटी की शिक्षा की उड़ान पर सूदखोरों ने ब्रेक लगा दिए है। मामला सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील के माधोपुर का है। यहां एक बेटी ने परिवार को सूदखोरी के दलदल से निकालने के लिए पढ़ाई छोड़ दी है। एक लाख के ढाई लाख चुकाने के बाद भी कर्जा पूरा नहीं हुआ तो मजबूर बेटी ने अब किताब की जगह हाथों में दांतिया थाम ली है। बकौल बेटी ममता, खेत में धान उगाकर वह अपने बीमार पिता का कर्जा उतारना चाहती है। लाडो का मानना है कि कर्ज के रुपयों ने उनके घर की हालत खराब कर दी है। हालांकि उसके दो भाई-बहन और हैं, लेकिन, उनकी पढ़ाई का जिम्मा बुआ व बड़ी दीदी ने संभाल रखा है।
बीमारी के उपचार के लिए उधारी
ममता की मां मनोज देवी के अनुसार उसके ससुर बीमार होने पर उन्होंने सूदखोरों से रुपए उधार लिए थे। उधारी के एक लाख के बदले पीडि़त परिवार ढाई लाख चुकता कर चुका है। लेकिन, फिर भी उनका ब्याज पूरा ही नहीं हो रहा है। जबकि अब तो उसके पति रामकरण भी चिंता में बीमार रहने लगे हैं। सूदखोरी के दंश ने पिछले साल सीकर में ही कइयों को डसा है। सीकर व लक्ष्मणगढ़ में सालभर में तीन जनों ने सूदखोरी से परेशान होकर जान दे दी।
फैक्ट फाइल
सूदखोरी के तीन साल में दर्ज मामले: 248
एफआर: 07
जांच जारी: 241
2019 में दर्ज मामले: 01
इनका कहना है
पुलिस के पास अभी तक लिखित में कोई शिकायत नहीं आई है। लेकिन फिर भी मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच कराई जाएगी।
बृजमोहन असवाल, पुलिस उपाधीक्षक, लक्ष्मणगढ़





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