सर्दी में बथुए का इस्तेमाल बेहद लाभदायक माना जाता है। इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। इसे खाने से गैस, पेट में दर्द और कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती हैं।
कच्चे बथुए के एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर रोजाना पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। गुर्दा, मूत्राशय और पेशाब के रोगों में बथुए का रस पीने से काफी लाभ मिलता है।
- बथुए को उबालकर इसके रस में नींबू, नमक और जीरा मिलाकर पीने से पेशाब में जलन और दर्द नहीं होता।
- सिर में अगर जुएं हो तो बथुए को उबालकर इसके पानी से सिर धोएं। जुएं मर जाएंगी और सिर भी साफ होगा। सफेद दाग, दाद, खुजली फोड़े और चर्म रोगों में इसका रस फायदा करता है।
- बथुए के नियमित प्रयोग से रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
- जब तक मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, नित्य इसकी सब्जी खाएं। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएं, इससे पेट के हर प्रकार के रोग यकृत, तिल्ली, अजीर्ण, गैस, कृमि, दर्द, अर्श पथरी ठीक हो जाते हैं।
- सफेद दाग, दाद, खुजली, फोड़े आदि चर्म रोगों में नित्य बथुआ उबालकर, निचोड़कर इसका रस पिएं तथा सब्जी खाएं। बथुए के उबले हुए पानी से चर्म को धोएं। बथुए के कच्चे पत्ते पीसकर निचोड़कर रस निकाल लें। दो कप रस में आधा कप तिल का तेल मिलाकर मंद-मंद आग पर गर्म करें। जब रस जलकर पानी ही रह जाए तो छानकर शीशी में भर लें तथा चर्म रोगों पर नित्य लगाएं। लंबे समय तक लगाते रहें, लाभ होगा।





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