जोधपुर। विश्नोई टाइगर फॉर्स ने नील गायों को मारने के लिए सरपंचों को अधिकार देने का विरोध करते हुए कहा है कि इस तरह का आदेश देने के कारण विश्नोई समाज वन मंत्री सुखराम विश्नोई से नाराज है। फाॅर्स के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवाद तथा समन्वयक नरेश पूनिया ने एक बयान में कहा है कि वन मंत्री ने विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में नील गाय मारने के आदेश देने की बात कही है जिससे विश्नोई समाज में गहरी नाराजगी है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया तो साधु संतों के साथ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसके अलावा जयपुर कूच कर सरकार को घेरा जाएगा। वन मंत्री कि सदबुद्धि के लिए यज्ञ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह जहांगीर भी नीलगाय मारने के खिलाफ थे तथा नीलगाय को गोवंश मानते हुए इसकी पूजा की जाती रही है। राजस्थान जम्भेश्वर जीव रक्षा वन पर्यावरण सेवा समिति नागौर महामंत्री शंकर लाल विश्नोई का कहना है कि मंत्री जीव रक्षा की बात करें तो अच्छी बात होती, लेकिन नील गाय को मारने की बात सदन में कहकर समाज सहित सनातन धर्म पर प्रहार किया है। लोग इस बात को कतई सहन नहीं करेंगे।
आपको बता दें कि विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के रामनारायण मीणा के सवाल के जवाब में सुखराम विश्नोई ने कहा था किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले नील गाय या रोजड़ों को प्रभावित किसान के आवेदन पर मारने की अनुमति देने का प्रावधान है। सभी जिलों के कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सरपंच को इस संबंध में अधिकार दे रखे हैं। इस संबंध में न तो कोई अर्जी दे रहा है और न ही व्यवहारिक रूप से इसकी पालना हो रही है। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने 2015 में सर्वे किया था, उस समय नील गाय की संख्या 70 हजार के आसपास थी। इसके बाद 2016 में 73 हजार और 2017 में 77,377 का आंकड़ा रहा है।





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