नर्इ दिल्ली। करीब दाे माह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार कटौती देखने को मिल रही है। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एक फैसले के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आम-आदमी को बड़ा झटका लग सकता है। दरअसल, सरकारी तेल कंपनियां अब पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर एक रुपए में प्रति लीटर को बोझ अपने उपर नहीं उठाएंगी। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने मिली जानकारी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आर्इ गिरावट की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगतार कटौती देखने को मिल रही है। एेसे में तेल कंपनियां अपने बोझ को कम करने की कोशिश कर सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की इतनी हुर्इ कमार्इ
इस फैसले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भी तेल कंपनियां इसका पूरा लाभ उपभोक्ताआें को नहीं पहुंचा पाएंगी। दरअसल, गत 4 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 1 रुपए प्रति लीटर की कटौती की मार्जिन को फिर से प्राप्त करना चाहती है। वित्त राज्य मंत्री द्वारा संसद की कार्रवार्इ के दौरान बताया था कि केंद्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में पेट्रोल पर 73,516.8 करोड़ रुपए आैर डीजल पर 1.5 लाख करोड़ रुपए का एक्साइज ड्यूटी वसूला है।
अक्टूबर माह में सरकार ने घटाया थ पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी
गौरतलब है कि गत 4 अक्टूबर को तेल की कीमतों में लगातार इजाफा होने के बाद सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 1.50 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी घटाने का निर्णय किया था। साथ ही सरकार ने तेल कंपनियों से कहा था कि वो भी प्रति लीटर 1 रुपए का बोझ उठाएं। वर्तमान में केंद्र सरकार पेट्रोल पर 19.48 रुपए प्रति लीटर आैर डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर का एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। गत 4 अक्टूबर से पहले अक्टूबर 2017 में भी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 2-2 रुपए प्रति लीटर घटार्इ थी।
वैश्विक बाजार में कटौती के हिसाब से नहीं कम हुए पेट्रोल-डीजल के भाव
गत 1 अक्टूबर के बाद से अब तक ब्रेंट क्रुड, सिंगापुर गैसोलिन, आैर अरब गल्फ डिजल की कीमतों मेें 37 फीसदी से 40 फीसदी तक की गिरावट आर्इ है। ध्यान देने वाली बात है कि घरेलू तेल विपणन कंपनियां ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 17 फीसदी से 18 फीसदी तक की ही कटौती की हैं। उम्मीद है कि मार्च अंत तक तेल कंपनियाें के नुकसान मार्जिन को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।
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