बांदीकुई. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में आयुष्मान भारत योजना के तहत विकसित किए गए वैलनेस केन्द्र (परिवार कल्याण केन्द्र) लोगों के स्वास्थ्य के लिए काफी हद तक कारगर साबित हो रहे हैं। लोगों में भी स्वास्थ्य को लेकर जागरुकता आने लगी है।
इन केन्द्रों पर जांच की समुचित व्यवस्था होने के साथ ही गंभीर बीमारियों के लक्षण एवं बचाव को लेकर लोगों की बैठकें कर जागरुक भी किया जाता है। गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए योग के जरिए उपचार किया जा रहा है। इससे लोगों का वैलनेस केन्द्र से जुड़ाव बढ़ता जा रहा है।
राज्य में अगस्त 2018 में 225 स्वास्थ्य केन्द्रों को वैलनेस केन्द्र (स्वास्थ्य कल्याण केन्द्र) के रूप में विकसित किया गया है। इसमें 100 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 100 उप स्वास्थ्य केन्द्र एवं 25 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं। दौसा जिले में बांदीकुई का उपस्वास्थ्य केन्द्र मुही व दौसा का मानपुरिया केन्द्र विकसित किया गया। इन केन्द्रों पर सास-बहु सम्मेलन, महिला मण्डल, युवा मण्डल एवं दम्पती दल की बैठक जैसी गतिविधियां आयोजित कर लोगों में स्वास्थ्य के प्रति अलख जगाई जा रही है। वहीं योग केन्द्र पर नियमित योग-प्राणायाम कराया जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए ये वैलनैस केन्द्र स्वास्थ्य के प्रति लाभदायक साबित हो रहे हैं।
बीमारी का पता लगा तो हुआ उपचार
मुही निवासी 49 वर्षीय मनमोहन ने बताया कि वह काफी समय से बीमार चल रहा था तो वैलनेस केन्द्र जाकर जांच कराने पर पता लगा की वह डायबिटीज से ग्रसित है। इस पर जांच कराकर उपचार करने के साथ ही योग करना शुरू कर दिया। अब वह काफी हद तक स्वस्थ है। इस केन्द्र पर हीमोग्लोबीन, यूरीन, बीपी, शूगर, बलगम एवं एलबोमिन सहित विभिन्न प्रकार की भी जांच की सुविधा है। इसके अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की स्क्रिनिंग की सुविध भी उपलब्ध है। ऐसे में लोगों में भी इस चिकित्सा पद्धति को लेकर जागरुकता आई है।
आउटडोर बढ़ा
सुविधाओं में इजाफा होने के साथ ही वैलनेस केन्द्र पर मरीजों का आउटडोर भी बढऩे लगा है। गत चार माह का मरीजों का आउटडोर करीब 12 सौ से अधिक पहुंच गया है। इस केन्द्र पर 121 संस्थागत प्रसव हो चुके हैं। यहां 7 मरीजों का डायबिटीज एवं 20 का हाइपरटेंशन बीमारी का एवं 1 मरीज का पैरालाइसिस का उपचार भी चल रहा है। इसके अलावा डायबिटीज एवं बीपी जैसी बीमारियों की स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा उपलब्ध होने से अब ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है।
वैलनेस केन्द्र विकसित होने से लोगों में जागरुकता आई है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहत्तर चिकित्सा देने से काफी हद तक मरीजों को उपचार में राहत मिलने लगी है। वहीं लोगों को आशा-सहयोगनियों के जरिये स्वास्थ्य के प्रति जागरुक किया जा रहा है। योग के जरिए भी बीमारियों का उपचार करने के लिए प्रयासरत हैं।
डॉ.जितेन्द्र शर्मा, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी





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