चूरू. आतंकियों व माओवादियों से लोहा लेने वाले अद्र्धसैनिक बलों के साथ भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने सौतेला व्यवहार किया। संगठन के पूर्व जवानों ने बताया कि सरकार ने सेना के सिपाहियों को शहीद का दर्ज देती है लेकिन अद्र्धसैनिक बल का जवान जब दुष्मनों से लड़ते मारा जाता है तो उसे शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। यह कितनी बिडंबना की बात है। जबकि अद्र्ध सैनिक बल रात-दिन जान पर खेलते हुए देश की सीमाओं की रखवाली करते हैं। पूर्व अद्र्ध सैनिकों ने सांसद को ज्ञापन देकर उनकी समस्या को लोकसभा में उक्त मुद्दा उठाने की मांग की।
सरकार ने बंद कर दी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त जवानों की पेंशन
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि 10 साल की सेवा देकर स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त हुए अद्र्धसैनिक बलों की सरकार ने कुछ साल तक पेंशन देकर बंद
कर दी। जिसे अतिशीघ्र चालू किया जाए। इससे देश के करीब सात सौ अद्र्धसैनिक जवान प्रभावित हुए हैं। यदि उनकी इस मांग को पूरा नहीं किया गया तो वे लोकसभा चुनाव में सरकार को इसका सबक सिखाएंगे। इस दौरान सचिव भरतलाल शर्मा, जिलाध्यक्ष दलीपसिंह डागर, रामस्परूप झाडिय़ा सहित अनेक सैनिक मौजूद थे।
ये हैं समिति की मुख्य मांगें
- वन रैंक वन पेंशन अद्र्धसैनिक बलों में भी लागू किया जाए
- हर राज्य में एक अद्र्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए, जिसे हर जिले तक विस्तृत किया जाए
- सरकारी नौकरियों में अद्र्धसैनिक बलों को आरक्षण दिया जाए
- इस संस्था को जमीन आवंटन की प्रक्रिया हो चुकी है तुरंत प्रभाव से राजगढ़ में जमीन का आवंटन किया जाए
- सेना की तहर उन्हे हर सुविधा व गौरव प्रदान किया जाए





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