बीकानेर.अगले माह होने वाले पुष्करणा समाज के सामूहिक विवाह समारोह में पारम्परिक वेशभूषा (विष्णु रूपी) दूल्हों कोरमक झमक संस्थान सम्मानित करेगी। मंगलवार से ही संस्थान ने अपने कार्यालय में विधिवत तैयारी शुरू की है। इस दौरान हुए संवाददाता सम्मेलन में संस्था के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा भैरू ने बताया कि पुष्करणा समाज का सावा 21 फरवरी को निर्धारित समय पर सबसे पहले बारह गुवाड़ चौक में रमक-झमक संस्थान के मंच के समीप पहुंचने वाले प्रथम दो दूल्हों को सपत्नीक श्रीनाथ की यात्रा का उपहार दिया जाएगा। इसमें दो दिन एक रात निशुल्क ठहर सकेंगे। साथ ही पांच दूल्हों को उपहार व सम्मान दिया जाएगा। सावा संस्कृति को बढ़ावा देने वाले परिवारों को भी सम्मानित किया जाएगा। इसी मौके पर 'बींद राजा पैली आओ, श्रीनाथजी जाओÓ पोस्टर का लोकर्पण किया गया। इसमें रतन महाराज ओझा, ओमप्रकाश भादाणी, सतीश किराड़ू, शिवराज छंगाणी आदि मौजूद रहे।
मिलेगी सुविधा
सावे को लेकर जल्द ही सेवा सुविधाओं का शिविर शुरू किया जाएगा। इसमें पाग, साफा बांधने की सेवाएं मिलेगी। साथ ही लग्न भरने, मुहूर्त, पूजन सामग्री, यज्ञोपवित के लिए पाटी, खड़ाऊ, गेडिया, खिरोड़ा की सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
कुरीतियां हटाने का संदेश
पत्रकार वार्ता में मौजूद साहित्यकार शिवराज छंगाणी ने कहा कि कुरीतियों को मिटाने के लिए निश्चित तौर पर पहल होनी चाहिए। साथ विवाह में गाए जाने वाले पारम्परिक गीतों की आज प्रासंगिता है। उनका मूल स्वरूप बदल गया है। उनके शब्दों में शुभ संकेत होते है। सावे सुन्दर बने इसके लिए गीतों का सहारा लिया जाएगा।
साफ-सफाई का रखे ध्यान
सामूहिक सावे की सैकड़ों वर्ष पुरानी परम्परा है, इसमें देशभर से समाज के लोग शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर साफ-सफाई, रोशनी, पानी बिजली व यातायात के माकूल बंदोबस्त होने चाहिए। रमक-झमक संस्थान भी साफ-सफाई के लिए लोगों को जागरुक करेगी।





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