बीकानेर. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी को पार्टी महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी बनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कांग्रेस ने इससे पार्टी में नई उर्जा और बदलाव आने की बात कही, वहीं भाजपा ने इसे परिवारवाद को बढ़ावा देने वाला बताया। लोकसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने का असर क्या होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन उत्साहित स्थानीय कांग्रेस पदाधिकारियों ने खुशियां जरूर मनाई। राजस्थान पत्रिका ने प्रियंका गांधी के महासचिव बनने पर कांग्रेस व भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों से बातचीत की तो अलग-अलग बयान आए। प्रियंका के महासचिव बनने पर शहर जिला महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सुनीता गौड़ की मौजूदगी में मिठाइयां बांटी गई। उनके साथ शहर प्रदेश सचिव जिया उर रहमान, जिलाध्यक्ष यशपाल गहलोत, प्रदेश महासचिव डॉ. हैदर मिर्जा बेग, श्रीलाल व्यास, जावेद परिहार, नितिन वत्सस, ललित तेजस्वी, विकास तंवर, राहुल जादूसंगत आदि ने खुशी जाहिर की।
यह बोले कांग्रेस नेता
प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने से राजनीति में सकारात्मक बदलाव आएंगे। युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने और महिलाओं को तवज्जो देने की सोच रखने वाली कांग्रेस के कार्यकर्ता भी इस मनोनयन से उत्साहित हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की तरह प्रियंका गांधी का जादू भी लोकसभा चुनाव में दिखाई देगा।
भंवरसिंह भाटी, उच्च शिक्षा मंत्री एवं श्रीकोलायत विधायक
लोकसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति में आना बदलाव लाएगा। पार्टी को मजबूती मिलेगी। इससे कार्यकर्ताओं में भी उत्साह है। भाजपा इस मनोनयन से बौखलाई है, नकारात्मक रवैये के चलते वह वंशवाद व परिवारवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।
रामेश्वर डूडी, पूर्व विधायक, नोखा
युवा पीढ़ी को मौका और महिलाओं को आगे बढ़ाने की सोच के चलते प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने महासचिव बनाया है। पार्टी की इस सोच का असर लोकसभा चुनाव में दिखेगा। पार्टी सकारात्मक बदलाव कर रही है। राजस्थान की तरह केन्द्र में भी कांग्रेस की सरकार बनेगी।
कन्हैया लाल झंवर, प्रत्याशी, पूर्व विधानसभा क्षेत्र बीकानेर
यह बोले भाजपा के नेता
प्रियंका गांधी को कांगे्रस महासचिव बनाए जाने का मुद्दा पार्टी का व्यक्तिगत निर्णय है। मैं इसमें ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। इतना जरूर कहूंगा कि कांग्रेस ने यह मनोनयन कर परिवारवाद को बढ़ावा देने का काम किया है। तपे-तपाए कार्यकर्ताओं को कांग्रेस ने मौका नहीं देकर अपने ही वंश को राजनीति में उतारा है।
अर्जुनराम मेघवाल, केन्द्रीय राज्यमंत्री
कांग्रेस में प्रजातंत्र को कोई तवज्जो नहीं दी जाती। प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर पार्टी ने यह सिद्ध भी कर दिया है। भाजपा ने हर उस आम कार्यकर्ता को मौका दिया है, जो जमीन से जुड़ा था। प्रियंका के महासचिव बनने से भाजपा मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बिहारी लाल बिश्नोई, विधायक नोखा
कांग्रेस पार्टी परिवार का ही संगठन है। भाजपा व कांग्रेस में यही बड़ा अंतर है। कांग्रेस वंशवाद की राजनीति से आगे नहीं बढऩा चाहती। लोकसभा में कांग्रेस को हार का आभास हो गया है, इससे उसने राहुल की बहन प्रियंका को राजनीति में उतारा है।
सुमित गोदारा, विधायक, लूणकरनसर





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