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खान महाघूसकांड में अब हुआ एक और नया खुलासा : उदयपुर एसीबी ने अब उठाया यह कदम

मोहम्मद इलियास/उदयपुर . खान महाघूसकांड प्रकरण में नागौर जिले के भेड़ गांव में लाइम स्टोन ब्लॉक के लिए आरोपियों द्वारा खनिज नीति में परिवर्तन कर राज्य सरकार को हानि पहुंचाने का मामला सामने आया है। मामले में नागौर के तत्कालीन खनिज अभियंता मनीष वर्मा की प्रथमदृष्टया संलिप्तता आने पर उसने उदयपुर एसीबी न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका पेश की जिसे न्यायालय ने नामंजूर कर दी। जोधपुर निवासी खनि अभियंता मनीष पुत्र दयानंद वर्मा के विरुद्ध एसीबी ने लोकसेवक होते हुए षड्य़ंत्रपूर्वक पद का दुरुपयोग करने का आरोप माना। वर्मा पर आरोपी अशोक सिंघवी व संजय सेठी के निर्देश पर भेड़ स्थित लाइन स्टोन ब्लॉक को उनके मुताबिक खनिज नीति में तैयार कर जयपुर मुख्यालय प्रेषित करने का आरोप है। इसके अलावा नागौर निवासी कबीर व महेन्द्र सिंह को खींवसर नागौर में हाइग्रेड लाइम स्टोन के खनन के लिए जमीन दिलवा कर राज्य सरकार को हानि पहुंचाने का भी आरोप है। वर्मा के अधिवक्ता ने बचाव करते हुए कहा कि वर्मा ने किसी भी प्रकार का अवैध लाभ प्राप्त नहीं किया है। साक्ष्य भी एफआईआर में नहीं है। मूल आरोप पत्र में भी वर्मा का नाम नहीं है। वार्तालाप में भी विशिष्ट व्यक्ति को विशिष्ट भूमि खरीदने का कथन नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में एसीबी जयपुर के तत्कालीन आईजी दिनेश एमएन के नेतृत्व में टीम ने घूसकांड का खुलासा करते हुए प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी, अतिरिक्त निदेशक पंकज गहलोत, निजी दलाल संजय सेठी, अधीक्षण खनि अभियंता पुष्करराज आमेटा, खान उद्यमी शेर खां, धीरेन्द्र उर्फ चिंन्टू व अन्य को गिरफ्तार किया था। सभी आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट पेश की जा चुकी है। चार्जशीट में अनुसंधान जारी रखने का अंकन किया हुआ है।

 

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न्यायालय ने सुनवाई के दौरान माना कि खनि अभियंता वर्मा को उस समय पता था कि आरोपी अशोक सिंघवी एवं संजय सेठी भेड़ गांव में सस्ते दाम पर लाइम स्टोन खनि युक्त जमीन क्रय कर अनुचित लाभ कमाना चाहते हैं। आरोपी सिंघवी ने लाइम स्टोन की प्रकृति बदलकर अपने पद का दुरुपयोग स्वयं के लाभ के लिए किया। इस अनैतिक कार्य का पूर्ण ज्ञान होने पर भी अभियंता मनीष वर्मा ने भरपूर सहयोग किया था। वर्मा पर आरोप है कि उसने लाइन स्टोन जमीन का पता लगाने एवं जमीन की पूरी-पूरी जानकारी होने के बावजूद रजिस्ट्री मूल्य कम बता कर राजकीय राजस्व (स्टाम्प ड्यूटी) की चोरी करने में पूर्ण सहयोग किया। कबीर नाम के एक व्यक्ति से वार्ता के दौरान भेड़ गांव में सिंघवी व अन्य के लिए खरीदी गई जमीन से स्वयं व कबीर को होने वाले मुनाफे की एवज में एक लीज देने का षड़्यंत्र में शामिल होने के तथ्य भी उजागर हुए हैं। एसीबी ने आरोपी वर्मा व कबीर के मध्य बातचीत के अंश में भी उपयुक्त जमीन की किस्म को परिवर्तित करने की फाइल पर मंत्री एवं सचिव अशोक सिंघवी के मध्य विरोधाभास की स्थिति में मंत्री के किसी आदमी को प्रलोभन देकर फाइल निकालने का प्रयास की बात उजागर हुई। उक्त तथ्य में वर्मा के प्रथमदृष्टया आपराधिक षड्य़ंत्र में शामिल होकर रिश्वत लेकर दुष्प्रेरित करने की पुष्टि होती है। फाइल में आरोपियों द्वारा आपराधिक नीयत से राज्य सरकार की अमूल्य खनिज संपदा को स्वयं के निजी लाभ के लिए खनिज नीति में परिवर्तन कर षड्य़ंत्र पूर्वक खरीदने के बाबत तथ्यों की स्पष्ट पुष्टि होती है।



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