प्रतापगढ़. सभी सरकारें चिकित्सा को महत्वपूर्ण मानते हुए लाख सुविधाएं देने का दावा करें लेकिन प्रतापगढ़ जिले में हकीकत कुछ उलट है। यहां चिकित्सा सुविधाओं में खासी कमियां हैं जिनके चलते मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के सबसे बड़े जिला चिकित्सालय में ही संसाधनों और स्टाफ की कमी का खामियाजा मरीज और कार्यरत कर्मचारी भुगत रहे हैं। जिला चिकित्सालय में हर माह 1500 से 2000 मरीज एक्सरे के लिए पहुंचते हैं लेकिन अत्याधुनिक सुविधाओं को छोड़ सामान्य एक्सरे तक के लिए मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं स्टाफ और मरीजों को विकिरण के खतरे का सामना करना पड़ता है।
एक्सरे की बड़ी मशीन बंद
जिला चिकित्सालय में एकमात्र बड़ी एक्सरे मशीन लम्बे समय से बंद पड़ी हुई है। कई बार मांग के बावजूद अब तक नई मशीन नहीं आई है। मजबूरी में पोर्टेबल मशीन से एक्सरे करने पड़ रहे हैं।
सुरक्षा संसाधन भी नहीं
पोर्टेबल मशीन का एक नुकसान अधिक विकिरण भी है। बड़ी मशीन के मुकाबले इनमें विकिरण ज्यादा होता है। जिससे मरीज और यहां कार्यरत कर्मचारी दोनों को नुकसान हो सकता है। वहीं कर्मचारियों के पास लेड एप्रिन, लेड बेरियर और टीएलडी बेस तक नही है। विकिरण से बचने के लिए पोर्टेबल मशीन का बटन बाहर दरवाजे पर लटकाना पड़ रहा है।
वार्डो में नहीं जाती
एक्सरे के लिए बड़ी मशीन खराब होने से दो पोर्टेबल मशीन वार्डो से उधार ली गई है। इनमें एक मशीन सर्जिकल वार्ड और एक मशीन एफबीएनसी वार्ड से ले रखी है। दोनों मशीनों का उपयोग एक्सरे कक्ष में होने से ये मशीन वार्डो में एक्सरे के लिए नहीं जाती। जिसके चलते मरीजों और गम्भीर घायलों को एक्सरे के लिए परेशान होना पड़ता है।
रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं
जिला चिकित्सालय में एक्स रे के लिए रेडियोलॉजिस्ट तक नहीं है। ऐसे में रेडियोग्राफर को ही सभी मरीजों के एक्सरे करने पड़ रहे हैं। रेडियोग्राफर भी महज दो ही हैं जो यहां बड़ी संख्या में एक्सरे करवाने आने वाले मरीजों को देखते हुए नाकाफी है। रेडियोलॉजिस्ट और दो सहायक रेडियोग्राफर के पद लम्बे समय से खाली पड़े हुए हैं। एक रेडियोग्राफर का भी रिटायरमेंट होने वाला है। ऐसे में परेशानी और बढ़ सकती है।
.................................
अवगत करा रखा है...
स्टाफ और संसाधनों की कमी से उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है। मौजूदा संसाधन और स्टाफ से हर संभव बेहतर कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ राधेश्याम कच्छावा, पीएमओ, जिला चिकित्सलय, प्रतापगढ़





No comments:
Post a Comment