जया गुप्ता
जयपुर. कोई व्यक्ति नौकरी मिले बिना ही रिटायर हो सकता है? यह सवाल अटपटा भले ही लगे लेकिन राज्य में हजारों लोगों के साथ ऐसी ही स्थिति आने को है। नौकरी के लिए उनका चयन तो हो गया लेकिन नियुक्ति नहीं मिली। इंतजार करते-करते उम्र इतनी हो चली है कि 7-8 साल और निकल गए तो नौकरी मिले बिना ही 'रिटायरÓ हो जाएंगे। राज्य में पिछले 21 वर्षों से कई भर्तियां एक ही प्रकार की अनियमितताओं के कारण अटकी हुई हैं। इनमें अधिक नंबर वालों को नियुक्ति नहीं मिली जबकि कम नम्बर वाले नौकरियां कर रहे हैं। मामले कोर्ट पहुंचे, वहां से हरी झंडी भी मिल गई, नियुक्तियां नहीं मिलीं। सरकार ने कमेटियां बनाई, रिपोर्ट भी आई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। चयनित लोग नियुक्ति के लिए आज भी सचिवालय और मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं।
वर्षों गुजर गए इंतजार में, सुनवाई नहीं हो रही
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 1998
वर्ष 1998 में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में चयनित हुए अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति को तरस रहे हैं। इन अभ्यर्थियों ने मिलकर अखिल राजस्थान चयनित शिक्षक संघ 1998 तक बना लिया। इसके संरक्षक जितेंद्र पालीवाल ने बताया, उच्च को छोड़कर निम्न वरीयता वालों को नियुक्ति दे दी गई। मामला कोर्ट में गया, कुछ समय बाद रोक हट गई लेकिन सरकार ने नियुक्ति नहीं दी। करीब 1500 अभ्यर्थी नियुक्ति के इंतजार में हैं। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन सिंह ने बताया कि पिछली सरकार ने मामले के निपटारे के लिए मंत्री मंडलीय उपसमिति गठित की थी। कमेटी ने अनियमितताएं मानते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की अभिशंसा की थी। लेकिन नियुक्ति देने से पहले ही राज्य में सरकार बदल गई। अब नई सरकार से नियुक्ति की मांग की है।
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 के चयनित कई अभ्यर्थी अब भर्तियों की आयु सीमा पार कर चुके हैं। चयनित अभ्यर्थी सतीश शर्मा ने बताया कि 2012 में 40 हजार पदों के लिए यह भर्ती परीक्षा हुई थी। परीक्षा एजेंसी की गलती ने बिगाड़ा कर दिया। मेरे 129 अंक थे जबकि कटऑफ 130 गई। लेकिन विभाग ने 126 अंक तक वालों के दस्तावेजों का सत्यापन किया। मामला कोर्ट में गया तो रिजल्ट रिवाइज हुआ, अंक बढ़ गए। 2016 में तीसरी बार रिवाइज रिजल्ट निकाला। नंबर बढ़कर 140 हो गए। कटऑफ 141 कर दी। जबकि जिन लोगों को नियुक्ति दी गई, उनके नंबर रिवाइज रिजल्ट में 120-125 हो गए। वे लोग नौकरी कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने 2016 में हम 5 हजार अभ्यर्थियों को समायोजित करने का आदेश दिया था पर सरकार पद भरे होने का हवाला देती रही।
नौकरी लग भी पाएगी या नहीं
अब तो बेटे की भी नौकरी लग गई। पोते-पोती हो गए, पर नियुक्ति नहीं मिली। पीड़ा किसे सुनाएं? रिटायरमेंट में कुछ ही साल बचे हैं। पिछली सरकार के दौरान भी नियुक्ति के लिए कई वर्षों तक संघर्ष किया। भगवान जाने सेवानिवृत्ति की उम्र तक नौकरी लग पाएगी या नहीं।
छोटेलाल यादव, चयनित अभ्यर्थी
तब 24 का था, अब 45 का हो गया हूं
वर्ष 1998 में तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में चयन हुआ। तब मैं 24 साल का था, अब उम्र 45 साल हो चुकी है। परिवार में पत्नी और 2 बेटियां हैं। तत्काल नियुक्ति मिल जाए तो भी अब केवल 15 साल की नौकरी बची है। तब नौकरी लग जाती तो 2 पदोन्नतियां पाकर व्याख्याता बन चुका होता।
प्रदीप पालीवाल, चयनित अभ्यर्थी





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