आबूरोड. रीको ग्रोथ सेंटर फेज-२ स्थित केमिकल इकाइयों के अपशिष्ट का मावल, चंद्रावती समेत फोरलेन के आसपास हो रहे निस्तारण की घटनाओं के बाद पाली में भी केमिकल का निस्तारण खुले में होने लगा है। पाली सदर पुलिस द्वारा सोमवार को हाइवे आबूरोड से आ रहे एक टैंकर को रूकवाया गया, तो पूछताछ में चालक ने टैंकर के आबूरोड स्थित इकाई का होना बताया, जिसे पाली में खुले में निस्तारण किया जाने वाला था।
गौरतलब है कि मावल के ग्रोथ सेंटर फेज-२ में पूर्व में भी केमिकल निस्तारण की घटनाओं हो चुकी है, जिसके बाद मावल स्थित कुछ भूखंड में बोरिंग का पानी लाल होने की भी भी शिकायत सामने आई थी, लेकिन इसे प्रदूषण नियंत्रण मंडल की लापरवाही ही कहें कि पंद्रह दिन में पानी की जांच रिपोर्ट भेजी जानी थी, लेकिन चार माह बाद भी ये रिपोर्ट स्थानीय अधिकारी को नहीं भेजी गई है। नतीजतन स्थानीय स्तर पर आगे कोई कार्रवाई नहीं है, ऐसे में चंद रुपयों के लिए खुले में केमिकल डालकर लोगों व पर्यावरण को खतरा पहुंचाने वालों के हौसले भी बुलंद है।
तहसीलदार द्वारा किया गया था मौका मुआयना
मामले में राजस्थान पत्रिका के इस सम्बंध में पूर्व में समाचार प्रकाशित करने पर १३ सितम्बर २०१८ तहसीलदार अनूपसिंह ने मौका मुआयना कर प्रदूषण नियंत्रण मंडल पाली के अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करवाया था और पानी के नमूने भेजे गए थे। जिसके बाद २१ सितम्बर २०१८ को तहसीलदार ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल पाली के कनिष्ठ वैज्ञानिक यशवंत मीणा, जलदाय विभाग के एईएन हेमंत गोयल, डिस्कॉम के एक्सईएन, डिस्कॉम एक्सईएन रंजीत मारू व विकास अधिकारी प्रतिनिधि की उपस्थिति में कुछ इकाइयों का मौका मुआयना कर ग्रोथ सेंटर स्थित होटल व पास स्थित इंडस्ट्री के बोरिंग में आ रहे लाल पानी के सेम्पल लिए गए थे। जिसकी रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों द्वारा पंद्रह दिन में सौंपने की बात कही गई थी, लेकिन चार माह बाद भी ये रिपोर्ट अधिकारी को नहीं मिली है। इससे विभाग की खुले में केमिकल निस्तारण व सम्बंधित प्रदूषण के प्रति गम्भीरता का भी अनुमान लगाया जा सकता है।
इन्होंने बताया ...
हां, पानी के सैम्पल की रिपोर्ट तो सम्बंधित विभाग के अधिकारी द्वारा निर्धारित समय में भेजी जानी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- अनूपसिंह, तहसीलदार, आबूरोड.





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