सादुलपुर.
संघर्ष से तकदीर अपने नाम लिखने की कहानी से यदि किसी को सीख लेनी हो तो युवा नीतेश को अपना आदर्श मान सकते हैं। क्योंकि छोटी सी उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। जैसे तैसे बड़ा हुआ तो खेल में उपलब्धि हासिल करने की मन में ठानी। निरंतर अभ्यास के बल पर नीतेश ने ऐसा मुकाम हासिल किया कि वह आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उसने हैमर थ्रो में विश्व में चौथी रैंक प्राप्त कर 80 मीटर से ऊपर हैमर थ्रो करने वाला भारत का प्रथम एवं बेस्ट एथलीट बना। गांव सरदारपुरा निवासी खिलाड़ी नीतेश पूनिया को उसके दादा-दादी ने मां-पिता का प्यार दिया। खिलाड़ी नीतेश गुरु और कोच जसवंत पूनिया के सान्निध्य में खेल की बारीकियां सीखी। पिता दलवीर सिंह का निधन होने के नीतेश का बचपन अभाव और संघष में बीता।
दादा रूपचंद एवं दादी की देखरेख में उसने पढ़ाईशुरू की। साथ-साथ उसने खेलों में भी अभ्यास जारी रखा। नीतेश ने दो वर्ष तक मात्र दौड़ और जंप का अभ्यास किया। उसने पहली बार हैमर थ्रो में १६ वर्ष आयु वर्ग की प्रतियोगिता में भाग लिया। राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद दूसरे वर्ष में भी १६ वर्ष आयु वर्ग की प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र को गौरवान्वित किया।
विपरीत परिस्थितियों में बॉक्सर प्रीति ने दिखाई प्रतिभा
सादुलपुर. सिधमुख मोड़ पर स्थित द्रोणाचार्य नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी की बॉक्सर गांव न्यांगल बड़ी निवासी प्रीति कुमारी कस्वा ने राष्ट्र स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतिभा दिखाई है। प्रीति ने बॉक्सिंग की शुरुआत वर्ष 2012 से जिला बॉक्सिंग संघ चूरू के सचिव गौरासिंह सहारण की प्रेरणा से शुरू की। मात्र 12 वर्ष की आयु में खेलना शुरू किया तथा पहला गेम अक्टूबर 2012 को स्टेट बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में खेलकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। जिसके बाद प्रीति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2016 से द्रोणाचार्य नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी में कोच द्रोणाचार्य अवार्डी अनूप कुमार सहारण के मार्गदर्शन में अपना अभ्यास एवं प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रीति के पिता विनोद कुमार के बचपन में देवलोक गमन हो गए तथा उसकी माता एएनएम पद पर कार्यरत हंै। खेती-बाड़ी भी करती है। उनके दादा लकवा रोग से पीडि़त हैं। प्रीति को खेल क्षेत्रों में माता सरोज देवी ने प्रोत्साहित किया। अपना आदर्श गौरासिंह सहारण एवं कोच अनूप सहारण को मानती है।
नेहा व दीपिका ने इसलिए बनाया रोबोट
सरदारशहर. आतंकवाद आज देश में बड़ी समस्या बन गई है। इससे निपटने के लिए सरकार अनेक उपाय कर रही है। कुछ ऐसा ही उपाय किया है सरदारशहर की दो बेटियों ने। बेटियों ने आंतकवदियों को खोजने के लिए रोबोट तैयार किया है। इसे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता मिली है। विज्ञान केन्द्र गांधी विद्या मंदिर के निर्देशन में नेहा सैनी व दीपिका बोचीवाल ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए एक रोबोट बनाया है। इस रोबोट की राज्य एवं राष्ट्रीय प्रदर्शनियोंं में सराहना हो रही है। आज के वैज्ञानिक युग में विभिन्न प्रकार के कार्यो को संपन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के रोबोट बनाए जा रहे हैं। लेकिन सरदारशहर की बेटियों ने ऐसा रोबोट बनाया है जो पहाड़ों पर चलकर आतंकवादियों का पता लगाएगा। यह रोबोट कम्प्यूटर अथवा रीमोट कंट्रोल से चलाए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक रोबोट मनोरंजन के लिए होते हैं।
सभी प्रकार के रोबोट में अत्याधिक जटिल पूर्जो तथा लाखों रुपए का खर्चा होता है। अधिक देशों में छात्रों द्वारा बनाए जाने वाले प्रोजेक्ट अधिक कीमती होने के बावजूद विशेष उपयोगी नहीं होते। परन्तु नामी कंपनियों द्वारा बनाए गए रोबोट करोड़ों की लागत से बनते हंै और उनका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र तथा उद्योगों में होता है। छात्राओं ने यह रोबोट अत्यंत सरल तथा कम लागत से बनाया है। हमारे देश में विभिन्न प्रकार की आतंकी नक्सली घटनाओं के समाधान में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगा। यह एक प्रकार से बहुमंजिला इमारत तथा पहाड़ी क्षेत्रों एवं जगलों में आतंकवादियों को ढूढऩे के लिए इसका उपयोग हो सकता है। इसके साथ लगा हुआ वायरलैस कैमरा तथा कंट्रोलरूम में लगा मॉनिटर इसके सामने आने वाला प्रत्येक दृश्य व वस्तु को दिखाता रहता है। जिससे सुरक्षा कर्मचारियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसमें वायरलैस कैमरा, मॉनिटर, रिसिवर, गेयरबॉक्स, डीसी विद्युत मोटर, वैग लोहे की चद्दर, लकड़ी, नट, बोल्ट, प्लाई, पाइप, बैटरी, सुचालक तार, सीढियों का नमूना, स्विच आदि लगाए गए हैं।
इस सिद्धान्त से चलता है रोबोट
इस प्रोजेक्ट से हमें निम्न सिद्धान्तों की जानकारी होती है। विद्युत मोटर का सिद्धान्त, सामान्य विद्युतीय परिपथ का ज्ञान, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के प्रसारण एवं ग्रहण करने का सिद्धान्त
ये है कार्य प्रणाली
लकड़ी के एक आयताकार प्लेटफार्म एक गियरबॉक्स व्यवस्थित किया गया है। इसके संचालन के लिए डीसी की विद्युत मोटर लगाई गई है। गियरबॉक्स के अन्तिम दूरी पर चित्र में दिखाएं अनुसार पहिए व्यवस्थित किए गए हैं। जब विद्युत मोटर में बैटरी से विद्युत प्रवचाहित की जाती है तो इस प्रकार धूमते है कि अपनी बनावट के कारण एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी पर चढ़ जाते हैं। इस प्लेट पर लगा वायरलैस कैमरा सामने के दृश्य के अपने एन्टीना द्वारा वायुमण्डल में प्रसारित करता है। यह प्रसारण कंट्रोल रूम में स्थित उसी घर के एंटीने में पहुंचकर मोनिटर में दृश्य दिखाता है। इस प्रकार यह सीढ़ी रोबोट ऊबड़-खाबड़ जगहों तथा सीढिय़ों पर किसी इमारत में छुपे आतंकवादियों का पता देता है। जिसमें जो कार्य व्यक्तियों के द्वारा कराया जा सकता वह कार्य रोबोट के द्वारा किया जाता है। इससे जनहानि नहीं होगी।
इसका उपयोग
इसकी बनावट उपरान्त है, यह अत्यंत कम लागत से बनाया जा सकता है, इसका संचालन तथा रख-रखाव अत्यंत कम है, इसे दुर्गम छुपी हुई जगहों पर भेजा जा सकता है, मशीनों के द्वारा काम होने से जन हानि नहीं होती, इसे दूर से नियंत्रण किया जा सकता है।





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