प्रमोद भटनागर
पीपली आचार्यान. राजसमंद व रेलमगरा तहसील के दर्जनों गांवों की जीवन रेखा कहलाने वाली बनास नदी से अदालती रोके बावजूद लगातार बजरी दोहन को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। बजरी दोहन रोकने को लेकर ग्रामीण और युवाओं ने नदी पर पहरा देना भी शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों ने बताया कि रोक के बाद भी खनन विभाग के संरक्षण में धड़ल्ले से दिन-रात हो रहे बजरी दोहन के चलते पीपली अहिरान गांव में सोमवार को नवयुवक मण्डल के कार्यकर्ताओं एवं ग्रामवासियों ने एकजुट होकर बनास नदी से बजरी निकासी पर रोक लगा दी। दोपहर बाद सभी ग्रामीण बनास नदी पहुंचे और बजरी ले जाने वाले वाहनों को खदेड़ दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने बनास नदी तक जाने वाले ट्रैक्टरों के रास्तों सहित पीपली अहिरान की सीमा में जेसीबी मशीन से चार-चार फीट तक गहरे एवं चौड़े खड्डे करवा कर सभी रास्तों को बंद करवा दिया।
युवाओं का पहरा
पीपली अहिरान के पास बनास नदी से बजरी दोहन पर नियंत्रण के लिए एकजुट हुए नवयुवक मण्डल के कार्यकर्ता और ग्रामीण लगातार 24 घण्टे पहरा दे रहे हैं। हालांकि बजरी दोहन के लिए आने वाले टै्रक्टर चालकों को समझाकर लौटाया जा रहा है। साथ ही उन्हें भविष्य में बजरी दोहन के लिए यहां नहीं आने की हिदायत भी दे रहे हैं। बताया कि गांवों के विरोध के बावजूद रेती का दोहन लगातार जारी रहने से बनास नदी का स्वरूप ही बदल गया है।
बढ़ा जल संकट
बनास किनारे बसे गांवों के लोगों को दूसरे के किए की सजा भुगतनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बजरी दोहन से बनास नदी तट के गांवों के ग्रामीण जल संकट से जूझने को मजबूर हो रहे हैं।





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