दौसा. आज सूरज की पहली किरण के साथ ही नववर्ष 2019 का आगमन हो गया। हर बार की भांति यह नववर्ष नए संकल्पों, नईआशाओं, उम्मीदों को संजोए हुए है। नववर्ष में बदलाव की बयार है और उम्मीदें भी अपार है। नई सरकार सरकार का भी गठन हुआ। जिले स्तर पर प्रशासनिक नेतृत्व भी बदलाव हो रहा है। सरकारी ढांचे, कार्यशैली, परिदृश्य में भी बदलाव हो रहा है। नई नई योजनाओं, नई सरकार व जनप्रतिनिधियों के नवसंकल्पों से लोगों की अपेक्षा उम्मीदें भी परवान पर है। दौसा जिले में वैसे तो आशाओं का अम्बार है, लेकिन लोगों को उम्मीद है कि उनके चिर लम्बित कुछ खास काम इस वर्ष होंगे। जिले की प्रमुख 19 उम्मीदों पर फोकस यहां फोकस किया गया है।
1. ईसरदा बांधसे भी मिले पानी तो मिले राहत
जिले को पिछले कई वर्षों से ईसरदा बांध के पानी का इंतजार है। 18 हजार करोड़ की योजना पर काम पर काम हो तो लोगों को राहत मिले। जिला मुख्यालय, बांदीकुई, बसवा आदि जगह तो सप्ताह में आधा घंटे पानी मिल रहा है। वहीं लालसोट, महुवा, सिकराय आदि इलाकों में भी जलसंकट गहराने लगा है। बीसलपुर बांध से तुंगा होते हुए दौसा पानी पहुंचाया गया है, लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा समान है।
2. सीवरेज का सपना हो पूरा
जिला मुख्यालय दौसा, बांदीकुई, लालसोट, महुवा आदि निकाय क्षेत्र में सीवरेज की कमी लोगों को अखर रही है। गत दोनों सरकारों ने सीवरेज का सपना दिखाया, लेकिन काम नहीं हो रहा है। सीवरेज के अभाव में खुले नाले गंदगी से अटे रहते हैं। सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्व'छ भारत का सपना अधूरा है।
&. बांदीकुई व खानभांकरी में ओवरब्रिज या अण्डरपास की दरकार
बांदीकुई में आगरा फाटक शहर की मुख्य समस्या है। कई बार तो इस फाटक पर लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ जाता है। बांदीकुई वासियों को फाटक पर ओवरब्रिज या अण्डरपास निर्माण की उम्मीद है। बसवा व खान भांकरी में भी फाटक की समस्या नासूर बन गई है। इससे यातायात जाम रहता है।
4. मेडिकल व तकनीकी शिक्षा कॉलेज की जरूरत
जिले में कोई बड़ा सरकारी शिक्षण संस्थान नहीं है, जहां प्रोफेशनल शिक्षा मिलती हो। जिला अस्पताल का दर्जा बढ़ा दिया जाए तो यहां मेडिकल कॉलेज खुल सकता है। इसके अलावा इंजीनियरिंग या अन्य कोई तकनीकी शिक्षा के लिए कॉलेज की जरूरत भी है। बांदीकुई में महिला कॉलेज की मांग लम्बे समय से अधूरी है। नांगल राजावतान सहित अन्य कई कस्बों में भी कॉलेज की जरूरत है।
5. सिलिकोसिस पर लगे अंकुश
जिले के पत्थर उद्योग से जुड़े श्रमिकों में सिलिकोसिस का ग्रहण लग रहा है। सिलिकोसिस बीमारी के भय से इन उद्योगों में श्रमिक काम करने के लिए ही तैयार नहीं है। इन श्रमिकों को इस बीमारी से निपटने के लिए सरकार से बड़ी उम्मीद है। इस कार्य को करने वाले सैकड़ों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। इस पर रोकथाम लगाने की सख्त आवश्यकता है।
6 . बंद औद्योगिक इकाइयां हो शुरू
किसी भी जिले की आर्थिक रीढ़ उसके औद्योगिक विकास के ताने-बाने से होती है। जिले में कोई नया उद्योग पनपने की जगह पहले से चल रही छोटी औद्योगिक इकाइयां भी बंद होने के कगार पर हैं। अब सरकार में परसादीलाल मीना को उद्योग विभाग की कमान मिली है। दौसा, बापी, डिडवाना, कौलाना आदि जगह रीको औद्योगिक क्षेत्र का विकास, लवाण का दरी उद्योग पनपने व भाण्डारेज में कालीन पार्क एवं सिकंदरा ग्रोथपोल बनने की भी लोगों को उम्मीद है।
7. यातायात में जाम का दंश
जिले में दौसा शहर, लालसोट, बांदीकुई, सिकंदरा चौराहा सहित कई जगह यातायात अव्यवस्था का आलम है। लोगों को बेतरतीब पार्किंग के कारण जाम का दंश झेलना पड़ता है। दौसा शहर में रिंग रोड बनाने की कवायद चलते करीब एक दशक होता आया है, लेकिन काम नहीं पूरा हो रहा।
8 . चिकित्सा राजधानी पर निर्भर
जिले में सरकारी स्तर पर चिकित्सा सुविधाएं बेपटरी है। राजधानी जयपुर पर ही निर्भरता है। यहां के अस्पतालों से अधिकतर मरीजों को जयपुर रैफर कर दिया जाता है। जिले में बस जिला चिकित्सालय में ही सिजेरियन डिलेवरी हो पा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। बांदीकुई सीएससी को अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए नगरपालिका एनओसी नहीं दे रही एवं कई वर्र्षो से सोनोग्राफी भी बंद है। कई गांवों में स्वास्थ्य केन्द्रों का अभाव है।
9. परिवहन साधन समुचित हो उपलब्ध
जिले से रोजाना हजारों लोग काम-काज रोजगार के लिए जयपुर एवं अलवर की ओर यात्रा करते हैं, लेकिन परिवहन के समुचित साधनों का अभाव है। करीब 20 वर्ष पहले स्वीकृत दौसा-गंगापुर रेल परियोजना भी अधूरी पड़ी है। जिला मुख्यालय तक से रोडवेज बसें सीधी बायपास से गुजरती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो परिवहन सेवाओं के अभाव में जान जोखिम में डालकर निजी जीपों से यात्रा करनी पड़ती है।
10. स्टेडियम की सुधरे दशा, शुरू हो जिम्नेजियम
जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन खेल सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। पीजी कॉलेज में एक करोड़ की लागत का जिम्नेजियम शुरू नहीं हो सका है। जिला मुख्यालय स्थित खेल स्टेडियम की हालत खराब है। इसके अलावा उपखण्ड मुख्यालयों पर भी अलग स्टेडियम की सुविधा नहीं है। इन पर काम हो तो जिले की खेल प्रतिभाओं को मौका मिल सकता है।
11. मनोहरपुर-कौथून राजमार्ग हो शुरू
दौसा जिले में होकर गुजर रहे मनोहरपुर-कौथन राष्ट्रीय राजमार्ग का 6 0 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। लोगों को उम्मीद है कि हाइवे इस वर्ष शुरू हो सकता है। इस मार्ग होकर दौसा होकर दिल्ली, भरतपुर,अलवर, आगरा समेत कई जिलों एवं राÓयों के लोग रणथम्बौर अभयारण्य, गणेश मंदिर, टोंक, कोटा, बूंदी समेत कई स्थानों पर जाते हैं।
12. एमडीआर की मिल सकती है सौगात
जिले में कई एमडीआर 6 & बीघावास मोड़ से लालसर मार्ग तक की सौगात मिल सकती है। इस मार्ग के लिए 7 करोड़ रुपए की राशि आवंटित हो कर इसके लिए टैण्डर भी हो चुके हैं। वहीं दौसा - लवाण मार्ग पर भी डामरीकरण की सौगात मिलने की सम्भावना है।
1&. दौसा- गंगापुर रेल लाइन पर ट्रेन चालू होने की उम्मीद
दौसा से गंगापुर के लिए बिछाई जा रही रेलवे लाइन का काम इस वर्ष लगभग पूरा होने की सम्भावना है। इस ट्रेक पर दौसा से डिडवाना तक करीब-करीब काम पूरा हो चुका है।
14. मण्डियों को बोर्ड मिलने की उम्मीद
दौसा जिले की आधा दर्जन कृषि उपज मण्डियों में बोर्ड गठन हुए सात वर्ष हो चुके हैं। उम्मीद है कि भाजपा सरकार मण्डियों में चुनाव नहीं करा पाई उसको इस बार कांग्रेस सरकार पूरा करा सकती है।
15. डेयरी खुलने की उम्मीद
जयपुर डेयरी की शाखा दौसा डेयरी को स्वतंत्र डेयरी के रूप में स्थापित कर दिया जाए तो यहां के किसान एवं दुग्ध उत्पादकों को फायदा मिल सकता है। डेयरी खुलने से समितियों के दूध खराब होने की सम्भावनाओं से भी निजात मिल सकती है।
16 . महिला वार्ड चालू होने की उम्मीद
दौसा जिला अस्पताल में इस समय सभी मरीजों को एक की वार्ड में भर्ती किया जाता है। यदि मेडिकल वार्ड में महिला वार्ड को अलग शिफ्ट कर दिया जाए तो मरीजों को काफी सुकून मिल सकता है।
17. सिकराय, पापड़दा, बैजूपाड़ा में खुलें पुलिस थाने
जिले में सिकराय, पापड़दा व बैजूपाड़ा में नए पुलिस थाने खुले तो लोगों को अपराध से मुक्ति मिल सकती है। पिछली सरकार ने यहां पुलिस थाने खोलने की घोषणा भी की थी, लेकिन फाइल ठण्डे बस्ते में चली गई।
18 . श्यालावास जेल सहित कई नए भवन तैयार, शुरू हो तो मिले राहत
जिले में करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से तैयार 1 हजार खूंखार बंदिया के लिए बनी श्यालावास जेल भवन, जिला मुख्यालय पर बना कृषि विभाग का कार्यालय, आलूदा का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं ढिगारिया कॉलेज समेत कई ऐसे कई भवन हं,ै जो बन कर तो तैयार हो चुके हैं, लेकिन इनको अभी तक चालू नहीं किया गया है।
19. श्रम विभाग में पड़े हजारों आवेदनों का हो निस्तारण
जिला मुख्यालय स्थित श्रम विभाग में जिले के करीब 10 हजार लोगों की श्रमिक डायरी, बेटियों की शादी के बाद शुभशक्ति योजना में मिलने वाली राशि एवं गरीबों के बालकों को छात्रवृत्ति के करीब 10 हजार आवेदन लम्बित पड़े हंै। लोगों को आस है कि नई सरकार बन गई तो उनकी फाइलों का भी निस्तारण होगा।





No comments:
Post a Comment