नर्इ दिल्ली। हजाराें वेतनभोगियों के प्रोविडेंट फंड आैर पेंशन फंड पर खतरे का साया मंडरा रहा है। दरअसल, इन फंड्स ने इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज में निवेश किया था। इकोनाॅमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन फंड्स ने 15,000-20,000 रुपए का निवेश किया था। इनमें से रिटायरमेंट फंड हैंडल करने वाले कर्इ फर्म्स ने बाॅन्ड या पूंजी के रूप में IL&FS में निवेश किया था। इन फंड्स को उम्मीद थी कि IL&FS का रेटिंग एजेंसियो ने AAA रेटिंग दिया है, एेसे में इनसे उन्हें बेहतर रिटर्न मिलेगा।
इन जगहों से IL&FS को मिला था निवेश
चूंकि, इन फंड्स में कुछ खास पारदर्शिता नहीं जिसकी वजह से निवेश की पूरी रकम के बारे में नहीं पता चल सका है। विश्लेषकों का अनुमान है कि पूरी रकम 20,000 करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकती है। गौरतलब है कि IL&FS संकट में करीब 91,000 रुपए की पूंजी फंसी जिसका 61 फीसदी हिस्सा बैंक लोन आैर 33 फीसदी हिस्सा डिबेंचर्स, काॅमर्शियल पेपर्स, नियामकीय फाइलिंग आदि रूप में है। लोन देने वाले बेैंकाें में यस बैंक , पंजाब नेशनल बैंक, इंडसइंड बैंक आैर बैंक आॅफ बड़ौदा का सबसे अधिक हिस्सा है। लेकिन प्रोविडेंट फंड्स आैर पेंशन संबंधि आंकड़ों काे लेकर पूरा डेटा अभी तक उपलब्ध नहीं है।
कैसे होगी नुकसान की भरपार्इ
इस मामले से जुड़े एक जानकार का कहना है, "IL&FS समूह प्रोविडेंट का अनुमानित 40 फीसदी हिस्सा है।" इस संकट के बाद नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) द्वारा IL&FS को क्रेडिटर्स द्वारा पूंजी दिए जाने पर रोक लगने के बाद बाजार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एेसे में अभी तक यह बात साफ नहीं हो पार्इ है कि ये प्रोविडेंट फंड आैर पेंशन फंड अपने नुकसान की भरपार्इ करेंगे। इसका सबसे बड़ा असर पेंशनभाेगियों पर पड़ सकता है।
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