पीपली आचार्यान. फसल खराबे से आहत होकर खुदकुशी करने वाला पीपली आचार्यान का किसान लेहरूलाल और उसका परिवार आर्थिक तंगहाली का शिकार था। लेहरूलाल की चिंताओं की हिस्सेदार उसकी पत्नी भी बराबर की रही। लेहरू की आर्थिक मुश्किलों की फिक्र्र में पत्नी ने भी कर्ज ले रखा है। प्रशासन भले ही उसकी गरीबी का तथ्य नकार रहा हो, मगर हकीकत इससे अलग है।
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि मृतक की पत्नी गौरी देवी ने स्वयं सहायता समूहों और अन्य विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण ले रखा है। इससे जुड़े दस्तावेज उसकी कमजोर आर्थिक हालत को बयां करने के लिए काफी है। कई वित्तीय संस्थाओं में उसके ऋण बकाया चल रहे हैं। साथ ही इस परिवार के रिहायशी मकान के एक कमरे का अब तक दरवाजा भी लगा है। घर में प्लास्टर नहीं हुआ है और मकान का मुख्य दरवाजा भी आर्थिक स्थिति को खुद-ब-खुद बयां कर रहा है।
लेहरूलाल के परिवार की आर्थिक स्थिति की पड़ताल प्रशासन भी कर रहा है। प्रारम्भ में यह बात सामने आई थी कि लेहरू के नाम कहीं कोई बैंक आदि में ऋण बकाया नहीं है। प्रशासन ने भी यही दावा किया था, लेकिन पत्रिका की पड़ताल में पता चला कि कि अपने परिवार की माली हालत के कारण उपजी परेशानियों से अस्थायी तौर पर निजात पाने के लिए लेहरूलाल की पत्नी गौरी देवी ने अपने इलाके में चल रही विभिन्न वित्तीय संस्थाओं (माइक्रो फाइनेंस कम्पनियों) से बतौर स्वयं सहायता समूह सदस्य जुड़कर ऋण ले रखे हैं। गौरी देवी ने इन चार-पांच संस्थाओं से डेढ़ से दो लाख रुपए का ऋण ले रखा है, जिसकी बाकियात चल रही है।
पड़ोसी भी कर रहे पुष्टि
लेहरूलाल के आस-पड़ोस में रहने वाले नारायणलाल कीर, किशन कीर, कमलाबाई कीर, मांगीलाल कीर आदि लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की कि लेहरू का परिवार काफी लम्बे समय से आर्थिक दृष्टि से कमजोर हालत में है तथा बमुश्किल परिवार का गुजारा हो पा रहा है। यह भी बताया कि इन वित्तीय संस्थाओं से लिए ऋण की किश्तें चुकाने के लिए भी लेहरू व गौरी ने अक्सर इधर-उधर से पैसों की व्यवस्था की। गांव के अन्य लोगों ने भी कहा कि दयनीय आर्थिक स्थिति से यह परिवार काफी परेशानियां झेल रहा था और इस बीच सब्जी की फसल में अचानक हुए नुकसान से लेहरू काफी टूट गया था। आशंका है कि हालातों से घबराकर उसने अपना जीवन समाप्त कर लिया। ज्ञात हो, गत 30 दिसम्बर को लेहरूलाल ने अपने खेत पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली और इसके बाद सामने आया कि अत्यधिक सर्दी के कारण पाला पडऩे से बैंगन की फसल खराब होने से घबराकर लेहरू ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद राजस्थान पत्रिका की लगातार खबरों से जागा समूचा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया और घटना की पड़ताल करने में जुट गया।





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