आबूरोड. आबूरोड की धरा पर भी रेवदर, मंडार, पाथवाड़ा एवं डीसा में तैयार होने वाले आलू की फसल तैयार हो रही हैं। पिछले वर्ष ज्यादा पैदावर होने के बाद तपोवन में ललन भाई ने इस साल भी जैविक खेती के तहत डेढ़ बीघा भूमि में आलू की खेती की है। अब आलू की फसल खेतों में लहलहा रही है तथा अब तक अच्छी हालत में है। फसल में किसी भी तरह का खराबा अथवा रोग का प्रकोप नहीं होने के कारण अच्छी हालात में है। उन्हें इस बार करीब २० हजार टन उपज की भी उम्मीद है। पहले १३ हजार टन उपज मिली थी।
राख का छिड़काव
ललन भाई ने बताया कि आलू बाने वाले भाग में पहले ढैचा के बीच डाले, फिर पानी दिया उसके बाद ढाई फीट का होने पर उसको रोटिवेटर से क्रच कर दिया उसके बाद कलटी लगाकर दो तीन दिन के लिए छोड़ दिया। उसके बाद इसमें आलू डाले थोड़े दिन बाद फसल तैयार होने लगे इस दौरान इसमें कीड़ा लगता है, जिस पर राख डाली। राख में पोटाश होने के कारण कीड़ा मर जाता है। इसके बाद तीन बार जीवामृत तथा दो बार राख का छिड़काव किया जाएगा।
फव्वारा पृद्धति से मिलती है पाण
आलू की फसल को ज्यादा पानी भी देने से नुकसान होता है, ऐसे में इसको ड्रीप सिंचाई से तैयार किया जाता है, आलू के खेत को दो भागों में करके अलग अलग फव्वारें लगाकर पानी दिया जाता है। यहां की मिट्टी आलू के लिए बेहतर होने के कारण आलू का विकास जल्दी होता है। प्रबंधक भरत भाई ने बताया कि आलू की अच्छी उपज होने के बाद हल्दी तथा अन्य कंद मूलों की खेती की जाएगी। ताकि आने वाले समय में शहर समेत जिले के किसानों को स्थानीय फसल बोने के साथ साथ अन्य फसल को भी तैयार करने के लिए प्रोत्साहन किया जाएगा।





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