कोटा. पहला डीजल से विद्युत में परिवर्तित 10000 अश्व शक्ति (हॉर्स पावर) का ट्विन रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित होने के बाद देशभर में जरूरत के हिसाब से डीजल इंजनों के विद्युत इंजन में तब्दील करने की उम्मीद जगी है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि रेलवे की ओर से रेलपथ को विद्युतीकृत करने पर जोर दिया जा रहा है। हर साल विद्युतकृत रेलमार्ग में वृद्धि हो रही है, इसलिए ज्यादा विद्युत इंजनों की जरूरत पड़ रही है।
डीजल इंजनों का उपयोग विद्युतीकृत रेलमार्ग पर करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। पश्चिम मध्य रेले के कोटा, भोपाल और जबलपुर मंडल में भी डीजल इंजनों से ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। ऐसे विद्युतीकृत लाइन बढऩे पर यहां के डीजल इंजनों को भी विद्युत इंजन में बदला जा सकेगा।
पश्चिम मध्य रेलवे की सीपीआरओ प्रियंका दीक्षित ने बताया कि भारतीय रेल ने डीजल की बचत एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सम्पूर्ण विद्युतीकरण का निर्णय लिया। इसके अन्तर्गत डीजल इंजनों के स्थान पर विद्युत रेल इंजनों के निर्माण का निर्णय लिया गया। डीरेका ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए विद्युत रेल इंजनों के निर्माण के साथ ही पुराने डीजल रेल इंजनों को भी विद्युत रेल इंजन में परिवर्तित करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।
28 फ रवरी, 2018 को डीरेका ने 2600 अश्व शक्ति वाले पुराने डब्ल्यूडीजी 3ए डीजल रेल इंजन को 5000 अश्व शक्ति विद्युत रेल इंजन में रूपांतरित कर डब्ल्यूएजीसी 3 रेल इंजन की पहली इकाई का निर्माण किया। इससे ट्रेक्शन एचपी में 92 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस रेल इंजन की दूसरी इकाई 30 मार्च, 2018 को तैयार की गई। इन दोनों इकाइयों को स्थायी रूप से जोड़कर डीरेका ने 10000 अश्व शक्ति क्षमता के ट्विन को-को डब्ल्यूएजीसी 3 विद्युत रेल इंजन का निर्माण किया।





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