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अजमेर में है 114 साल पुरानी लाइब्रेरी, आप भी जानिए इसके हाल

अजमेर.

गांधीभवन स्थिति 115 वर्ष पुराना सार्वजनिक पुस्तकालय बिना पुस्तकालयक्ष के ही संचालित है। इससे पुस्तकालय आने वाले पुस्तकालय का सही लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें पुस्तकों की जानकारी देने वाला नहीं है। पुस्तकों का रिकॉर्ड भी सही ढंग से मेंन्टेंन नहीं हो पा रहा है। पिछले साल ही नगर निगम ने इसे आधुनिक रूप दिया था तब से यहां युवाओं सहित पुस्तक प्रेमियों की भीड़ उमड़ रही है। हाल यह है कि अब पुस्तकालय का मौजूदा हाल भी छोटा पडऩे लगा है। पुस्तकालय में 30 हजार से अधिक किताबें व प्राचीन ग्रंथ व इतिहास की पुस्तकें है। 113 साल बाद 5 सितम्बर 2018 को इसका पुनरोद्धार हुआ। प्रतिदिन 80-100 लोग यहां पुस्तकें व समाचार पत्र पढऩे के पुस्तकालय व वाचनालय का उपयोग करते हैं। पुरोद्धार के बाद करीब 200 लोगों ने इसकी सदस्यता ली है। लाईब्रेरियन नहीं होने से लोगों को पुस्तकालय से सम्बन्धित जानकारी देने वाला ही नहीं है।

सभी पुस्तकों की ई-कैटलोङ्क्षगग
वर्तमान में 113 वर्षो के पश्चात पुस्तकालय के जीर्णोद्धार हुआ साथ ही सभी पुस्तकों की ई-कैटलोङ्क्षगग भी की गई। पुस्तकालय में पुस्तकों की लोकेशन की जानकारी वाचनालय में रखे कम्प्यूटर के माध्यम से प्राप्त होगी। इसके लिए लिए ई-रीडिंग के लिए भी पुस्तकालय में किंडल और कम्प्यूटर उपलब्ध करवाए गए हैं। पाठकों की सुविधा के लिए वाचनालय को पूरी तरह से वाई-फाई बनाया गया है। गांधी भवन पुस्तकालय में 30 हजार से अधिक पुस्तकें वर्तमान में संग्रहित हैं जिनमें विभिन्न विषयों की पुस्तकेंं है। इनमें अजमेर मेरवाड़ा के आजादी के पूर्व के गजट तथा अंग्रेजी का क्लासिक साहित्य उपलब्ध है कई दुर्लभ पुस्तकें भी प्राप्त हुई हैं जिन्हें संरक्षित किया गया है।

शौचालयों में पानी नहीं
गांधीभवन के शौचालयों में पानी नही हैं। ऐसे में इसे इस्तमाल करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाहरी लोग इसका इस्तेमाल नहीं करें इसलिए इसमें ताला भी लगा दिया जाता है।

लाईब्रेरी में प्रवेश ही मुश्किल
लाइब्रेरी में प्रवेश के लिए दो द्वार बनाए गए हैं। एक मदार गेट की ओर से तथा दूसरा स्टेशन रोड की ओर से। स्टेशन रोड से हैवी ट्रैफिक के कारण प्रवेश मुश्किल है तो दूसरी ओर मदारगेट की तरफ प्रवेश द्वार पर आसपास के दुकानदार व अन्य अपने दो पहिया वाहन खड़े कर देते हैं ऐसे में पुस्तकालय में प्रवेश के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। प्रवेशद्वार पर आसपास के दुकानदारों ने भी कब्जा कर अपना सामान रख रखा है।

फैक्ट फाइल
शहर का सबसे पुराना पुस्कालय है। शहर की महत्वपूर्ण धरोहर है। मूलरूप से 1905 में गांधी भवन ट्रेवर टाउन हाल के रूप में स्थापित किया गया। जी.एच. टे्रवर 1855 से 1901 के बीच अजमेर मेरवाड़ा के चीफ कमिश्नर रहे। टाउन हाल एवं पुस्तकालय के लिए जमीन तत्कालीन बैरिस्टर अल्लारक्खा ने दान दी। इस पर तत्तकालीन नगर परिषद द्वारा इस टाउन हाल का निर्माण किया गया एंव 1905 में पुस्तकालय स्थापित किया गया।



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