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15 साल के शातिर बच्चे ने इसलिए रची अपहरण की झूठी कहानी, थानेदार से करवाया किडनैप होने का फोन

सीकर.

घर से स्कूल के लिए निकले 15 वर्षीय बालक ने अपने अपहरण की झूठी कहानी गढकऱ परिजन और पुलिस दोनों के पांव फुला दिए। अपने अपहरण की सूचना भी इस बालक ने परिजनों तक एक सेवानिवृत थानेदार के जरिए पहुंचाई। इसके बाद सेवानिवृत थानेदार को शंका हुई तो उसने बालक को वहीं बैठा लिया और परिजनों के आने के बाद उसको इनके हवाले कर दिया। इधर, बालक को सही सलामत देखकर परिजन और पुलिस दोनों ने राहत की सांस ली। सदर थाना के एसएचओ करन सिंह खंगारोत ने बताया कि बुधवार को दोपहर करीब एक बजे थाने पर देवगढ़ से फोन आया था। सूचना दी गई थी कि देवगढ़ से 15 वर्षीय रोहिताश का किसी ने अपहरण कर लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही हैडकांस्टेबल घीसाराम के साथ पुलिस की टीम को देवगढ़ भिजवाया गया। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही बालक के परिजन उसे दूसरे गांव से खोज कर घर ले आए थे। तसल्ली से जब बालक रोहिताश से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह स्कूल नहीं जाकर अपने मामा के यहां ननिहाल जाना चाह रहा था। जबकि परिजन उसे ननिहाल के बजाय स्कूल भेजने पर आमादा थे।


मास्टर माइंड है बालक
स्कूल नहीं जाने पर पुलिस ने उसके शिक्षक से बात की। शिक्षक का कहना था कि रोहिताश मास्टर माइंड है और पढ़ाई में भी होशियार है। उसके पिता विदेश में रहते हैं और भाई-बहनों में वह सबसे बड़ा है। हालांकि पुलिस को देखकर बाद में रोहिताश ने बता दिया था कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ है। वह अपनी मर्जी से ननिहाल में रहना चाह रहा था।


बाइक सवार को लिया झांसे में
हैडकांस्टेबल घीसाराम के अनुसार परिजनों को शक नहीं हो। इसके लिए बालक रोहिताश सुबह 8.40 बजे घर से स्कूल जाने की बात कहकर निकला। हालांकि उसके साथ स्कूल उसके चाचा का लडक़ा भी जाता है। लेकिन, बुधवार को वह भी स्कूल नहीं गया तो अकेले रोहिताश ने उधर से गुजर रहे एक बाइक सवार से लिफ्ट मांगी और झांसा देकर उसे अपने गांव छोडऩे की बात कही। इस पर बाइक सवार ने बालक समझ कर उसे बाइक पर बैठा लिया और उसके ननिहाल दूल्हेपुरा से पहले एक गांव में छोड़ दिया। यहां बैठकर उसने अपने अपहरण की झूठी साजिश रची। इसके बाद यहां रहने वाले सेवानिवृत थानेदार को बहकाया कि वह देवगढ़ का रहने वाला है और अपहरणकर्ताओं से बचकर वह यहां तक पहुंचा है। परिजनों के नंबर बताकर थानेदार से फोन करवाया। परिजनों ने इसकी सूचना रोहिताश के ताऊ सीताराम को दी तो वह उसे लेने सेवानिवृत थानेदार के पास पहुंचा और बालक को अपने साथ घर ले गया।



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