Breaking News
recent

20 करोड़ हम नहीं चुका सकते, प्रदूषण फैलाने वालों से वसूलो

पाली. एनजीटी द्वारा लगाई गई 20 करोड़ की पैनल्टी (अंतरिम मुआवजा) चुकाने को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। एनजीटी ने 20 करोड़ की पैनल्टी लगाई है, लेकिन यह पैसा कौन चुकाएगा इसको लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सीइटीपी से 20 करोड़ रुपए मांगे हैं, लेकिन सीइटीपी ने यह राशि चुकाने को लेकर हाथ खड़े कर दिए। सीइटीपी का साफ कहना है कि यह पैसा प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से वसूला जाना चाहिए। सीइटीपी नियमों से संचालित किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पत्र का जवाब देते हुए सीइटीपी ने लिखा है कि सीइटीपी कंसेंट टू ऑपरेट के नियमों के तहत चल रहा है। इससे जुड़ी हुई इकाइयां भी नियमों का पालन कर रही है। उन्होंने लिखा कि एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से २० करोड़ की पैनल्टी वसूलने के लिए कहा है। इसलिए वे यह पैसा चुकाने में समर्थ नहीं है।


प्रदूषण मामले में नगर परिषद पर उठाए सवाल
सीइटीपी ने नगर परिषद पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा कि सिटी सिवरेज का पानी नदी और नालों में डाला जा रहा है। इसलिए नगर परिषद भी प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने परिषद से भी जुर्माने की राशि वसूलने का सुझाव दिया। सीइटीपी ने यह भी लिखा कि शहर में कई अवैध फैक्ट्रियां चलती है और बाहर से एसिड के टैंकर नदी में खाली किए जाते हैं। अवैध गतिविधियां संचालित करने वालों से 20 करोड़ रुपए वसूलने की बात कही।


हम जिम्मेदार नहीं
एनजीटी ने एक करोड़ रुपए की पैनल्टी सीइटीपी पर लगाई है वह हम चुका रहे हैं। २० करोड़ रुपए प्रदूषण फैलाने वालों से वसूलने के लिए कहा है। यह राशि हम नहीं चुका सकते। सीइटीपी कंसेंट टू ऑपरेट नियमों के तहत संचालित किया जा रहा है। अवैध रूप से संचालित फैक्ट्रियां नदी-नालों में रासायनिक पानी छोड़ती है। इन सब के लिए हम जिम्मेदार नहीं है।
अशोक लोढ़ा, सचिव, सीइटीपी

रिव्यू बैठक में किया फॉलोअप, सख्ती के निर्देश, एनजीटी के निर्देशों की पालना के निर्देश
पाली. एनजीटी के निर्देशों की पालना को लेकर सोमवार को जयपुर में दो बैठकों का आयोजन किया गया। एक में पर्यावरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एनपीसी की नौ साल पहले जारी हुई गाइड लाइन पर चर्चा हुई तो दूसरी में प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सदस्य सचिव ने एनजीटी के निर्देशों का फॉलोअप लिया। सीइटीपी को शपथ पत्र देने के भी निर्देश दिए गए हैं।


प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सचिव शैलजा देवल ने रिव्यू करते हुए सीइटीपी से शपथ पत्र मांगा। इसमें ट्रीटमेंट प्लांटों के अपडेशन और अन्य प्लांटों के नियम तय करने की जानकारी देने के भी निर्देश दिए। मंडल सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का पालन करने पर ही सीइटीपी के मुख्य ट्रीटमेंट प्लांट संख्या छह की कंसेंट जारी की जाएगी। सीइटीपी अध्यक्ष प्रवीण कोठारी और सचिव अशोक लोढ़ा ने एनजीटी की गाइड लाइन फॉलो करने का आश्वासन दिया। उपखण्ड अधिकारी रोहिताश्वसिंह तोमर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अमित शर्मा, सीइटीपी अध्यक्ष प्रवीण कोठारी, उपाध्यक्ष कमलेश गुगलिया और सचिव अशोक लोढ़ा मौजूद रहे।


एनपीसी के निर्देशों की पालना रिपोर्ट मांगी
पर्यावरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनपीसी द्वारा 2010 में जारी गाइड लाइन की पालना रिपोर्ट पर चर्चा हुई। सचिव ने विभागवार रिपोर्ट देने के निर्देश देते हुए पूछा कि एनपीसी के निर्देशों की पालना कहां तक हुई है। बैठक के दौरान जिला कलक्टर दिनेशचंद जैन, नगर परिषद आयुक्त आशुतोष आचार्य भी मौजूद रहे।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.