झुंझुनूं। पुलवामा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड में शहीद श्योराम के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने भारत माता के जयकारे और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। शहीद के 4 साल के बेटे खुशांक ने उनका अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार से पहले शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
पुलवामा में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड में शहीद हुए जवान टीबा बसई निवासी शहीद श्योराम और उनके साथियों ने सोमवार तड़के तक आतंकियों का सामना किया और आखिर वे शहीद हो गए। जवान के शहीद होने की सूचना पर गांव में शोक की लहर छा गई। शहीद श्योराम तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। इनका एक भाई रूपचंद भी सेना में हिसार में तैनात हैं। तीसरा भाई रघुवीर घर पर ही रहता है।
श्योराम का गांव टीबा की हर गली आज उदास है, हर आंख नम है। ग्रामीणों का कहना है कि लाडले को खोने का गम तो हमेशा रहेगा, लेकिन गर्व इस बात का भी है उसने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। श्योराम जब दिसम्बर में छुट्टियों में आया था तब कहकर गया था, कभी पीठ नहीं दिखाऊंगा। देश के लिए जान देने से पहले दुश्मनों का सफाया जरूर करूंगा। आज श्योराम गुर्जर की ये बातें याद कर हर कोई दुखी है। श्योराम के सहपाठी रहे हरिशरण गुप्ता ने बताया, श्योराम गुर्जर मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। वे जब भी छुट्टी पर आते थे सभी से मिलकर जाते थे।
मासूम बेटा बोला- पापा दुश्मनों को मारने गए हैं
श्योराम काचार साल का बेटा खुशांक सोमवार को स्कूल गया था। उसे नहीं पता कि उसके सिर से अब पिता का साया उठा चुका है। उसने कहा, मेरे पापा फौज में है। दुश्मनों को बंदूक से मारते हैं। मैं भी बड़ा होकर फौज में जाऊंगा। मैं भी दुश्मनों को मारूंगा। मासूम की इन बातों से हर आंख नम हो रही थी।





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