भीलवाड़ा।
केंद्र ने हालिया अंतरिम बजट में टफ योजना के तहत अनुदान के लिए महज 700 करोड़ रुपए रखे जबकि करीब 5500 करोड़ रुपए की जरूरत है। अब अनुदान राशि नहीं आने से कपड़ा उद्योग पर संकट गहराएगा। कपड़ा उद्यमी नई तकनीक की मशीनें नहीं खरीद पाएंगे। नौ माह से टेक्सटाइल अपग्रेडेशन फण्ड (टफ) के तहत याज व पूंजीगत अनुदान के लिए टेक्सटाइल तरस रहा है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में मार्च तक लगभग दो हजार करोड़ रुपए का बैकलॉक जमा होगा। वर्ष 2019-20 के लिए टफ अनुदान के लिए 3500 करोड़ की आवश्यकता होगी। यानी पिछला मिलकार 5500 करोड़ के मुकाबले मात्र 700 करोड़ का बजट मिलना उद्योगों के विस्तार व आधुनिकीकरण में अड़चन बनेगा।
भीलवाड़ा को नहीं मिला अनुदान
टेक्सटाइल मंत्रालय का जेआईटी संयुक्त जांच दल टफ अनुदान के लिए औद्योगिक मशीनों का सत्यापन करता है। इस दल में मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी नोयड़ा, जिला उद्योग केन्द्र का प्रतिनिधि, निटरा पांवरलूम सेन्टर प्रतिनिधि तथा औद्योगिक संस्थान का प्रतिनिधि शामिल होता है। इस दल की रिपोर्ट के बाद ही टफ योजना में अनुदान मिलता है। भीलवाड़ा में ५-७ इकाइयों की संयुक्त जांच हो चुकी है, लेकिन अनुदान नहीं मिला है। भीलवाड़ा में ब्याज अनुदान के 17 करोड़ तथा पूंजीगत अनुदान ४ करोड़ बकाया हैं।
विश्व बाजार में पिछड़ रहा है कपड़ा उद्योग
विश्व में भारतीय कपड़े की विशेष पहचान है। भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली, बालोतरा, सूरत, इचलकरंजी आदि से कपड़ा व धागा निर्यात होता है। अब हर दिन नई तकनीक व डिजाइन विकसित हो रही है। विश्व के कई देशों में नई तकनीक आई है। भारत में कपड़ा उद्योग की पुरानी तकनीक है। ऐसे में विश्व के बाजार में देश का कपड़ा उद्योग पिछड़ रहा है। अब यहां उद्यमी नई मशीनें खरीदना चाहते हैं लेकिन टफ अनुदान नहीं मिलने से एेसा नहीं कर पा रहे हैं।
चेंबर ने लिखा पत्र
टेक्सटाइल उद्योगों का टफ अनुदान बकाया होने तथा अनुदान में परेशानी को लेकर कपड़ा मंत्री व आयुक्त को तीन बार पत्र लिखे हैं। जल्द ही प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर सम्पर्क करेगा।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स
टफ अनुदान का बजट कम
टफ में ब्याज व पूंजीगत अनुदान नहीं मिल रहा है। भीलवाड़ा में 21 करोड़ तथा देश में तीन क्वाटर्स के करीब दो हजार करोड़ रुपए का बैकलॉक चल रहा है। अगले साल में 35 करोड़ और चाहिए। सरकार ने अपने बजट में मात्र 700 करोड़ के बजट का प्रावधान रखा है। इससे उद्यमियों को अनुदान मिलने में परेशानी होगी।
अतुल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन





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