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राजस्थानी में पीएचडी कर रहे विद्यार्थियों को हर माह मिलेंगे 5 हजार

एमए कर रहे विद्यार्थियों को तीन हजार रुपए मासिक
बीकानेर. साहित्य अकादमी, नई दिल्ली और महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के तत्वावधान में सोमवार से दो दिवसीय संगोष्ठी शुरू हुई। इसमें कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में राजस्थानी में पीएचडी शुरू की गई है और इसमें सभी छात्रों को हर माह 5000 रुपए और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को 3000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलेगी। पहले साल में पीएचडी में दो सीटें व एमए में १३ सीटें उपलब्ध हैं।प्रो. सिंह ने कहा कि राजस्थानी भाषा के विकास के लिए कई संकल्प यात्राओं की आवश्यकता है। राजस्थानी के लिए सरकारों को झुकाने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस भाषा मे संवेदना होती है, वही आगे बढ़ती है। राजस्थानी भाषा जल्द ही कन्नड, गुजराती के बराबर होगी। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय राजस्थानी भाषा के ग्रन्थों का प्रकाशन करवाएगा।

 

साहित्यकार ही लोक क्षेत्र के चिकित्सक

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि संवत सोमगिरी महाराज ने कहा कि लोक क्षेत्र की चिकित्सा साहित्यकार ही करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे सभी राज्य अपनी मातृभाषा में संवाद करते हैं और उन्हें मान्यता भी प्राप्त है, लेकिन राजस्थानी भाषा को अभी तक मान्यता नहीं मिली है। राजस्थानी विभाग की प्रभारी डॉ. मेघना शर्मा ने बताया कि राजस्थानी के शीर्ष कहानीकार दो दिन सेमिनार में अलग-अलग विषयों पर विचार व्यक्त करेंगे। अकादमी प्रतिनिधि ज्योति कृष्ण वर्मा ने कहा कि मान्यता प्राप्त चौबीस भाषाओं के साहित्य पर अनेक पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सोहनदान चारण ने कहा कि राजस्थानी कहानी में सामाजिक परिस्थितियों का एकल समायोजन है। कहानीकार अपने समय का सत्य दिखाएं।

 

आधुनिक कहानी पर चर्चा की

प्रथम सत्र में मीठेश निर्मोही की अध्यक्षता में जितेन्द्र निर्मोही, मनोज स्वामी व अशोक व्यास ने राजस्थानी कहानी में परम्परा, संस्कृति और बदलाव के चिह्न दृष्टिगोचर बताते हुए आधुनिक राजस्थानी कहानी के विषय में भी चर्चा की। कमला कमलेश की अध्यक्षता में अरविन्द सिंह आसिया, भरत ओला, दिनेश पांचाल ने राजस्थानी कहानी में स्त्री विमर्श, दलित विमर्श व कहानी में संघर्ष और संवेदना की बात की। इस अवसर पर डॉ. नीरज दइया, कृष्ण कुमार आशु, देवकिसन राजपुरोहित, बुलाकी शर्मा, राजेन्द्र जोशी, मालचंद तिवाडी, हरीश बी शर्मा, डॉ. अजय जोशी, कमल रंगा, राजकुमार घोटड, डॉ. नितिन गोयल आदि उपस्थित थे।



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