योगेश श्रीमाली @ कुंवारिया. जिम्मेदारों की अनदेखी से वर्षों से जर्जर भवन पर बालिका माध्यमिक विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। दीवारों पर जगह-जगह दरारें हैं। छत की पट्टियां क्षतिग्रस्त हैं, जो कभी भी भरभराकर गिर सकती हैं। वर्ष 2010 में रमसा की टीम मरम्मत करने स्कूल गई लेकिन इमारत की जर्जर अवस्था देखकर बिना मरम्मत किए वापस लौट आई थी, उन्होंने इसे जर्जर घोषित करवाने के लिए कहा था। इसके बाद आजतक उन्हीं कमरों में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। कमरों में पर्याप्त प्रकाश नहीं होने से अंधेरा रहता है, कमरे काफी छोटे होने से अंदर घुटन महसूस होती है, जिससे छात्राओं को अध्ययन करने में खासी समस्याएं आ रही हैं।
ऐसे हैं हालात
बालिका माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह से दस के मध्य सवा तीन सौ छात्राएं अध्ययनरत हैं। कमरे संकुचित होने के साथ बाहर का रास्ता भी सकरा है। ऐसे में अगर कोई हादसा हो तो छात्राएं और स्टाफ भाग भी नहीं सकते। विद्यालय के कक्षा कक्ष में कई कमरे ऐसे हैं, जिनमें हवा रोशनी की माकूल व्यवस्था नहीं है, ऐसे में विद्यालय का वातावरण दम घोटू जैसे रहता है। कमरे सकरे होने से छात्राओं को काफी सटकर बैठना पड़ता है, जिससे उन्हें लिखने में भी समस्या होती है। अंधेरे के कारण लाइट गुल होने से पढ़ाई भी बाधित होती है। बालिकाओं की साईकिलें तक परिसर में खड़ी नहीं हो पाती है। विद्यालय के बाहर आवारा पशुओं की भरमार रहती है, जहां पर बालिकाओं के पशुओं से चोटिल होने का भय रहता है।
नहीं है मरम्मत योग्य
सन् 2009_10 में रामसा योजना के तहत विद्यालय की मरम्मत के लिए राशि आई। जब टीम काम करने पहुंची तो भवन की क्षतिग्रस्त दीवारों और छत को देखकर उन्होंने मरम्मत करने से इंकार कर दिया। टीम सदस्यों ने विद्यालय भवन को जर्जर बताया। टीम ने विद्यालय भवन को गिराकर इसका पुन: निर्माण करवाने की आवश्यकता जताई।
सांस्कृतिक व खेल की नहीं होती गतिविधियां
विद्यालय का भवन तथा परिसर इनता अधिक छोटा है कि विद्यालय में एक साथ सभी बालिकाओं को परिसर में बिठाना तक मुश्किल होता हैं। वहीं प्रार्थना, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन तथा खेल गतिविधियों का संचालन भी मुश्किल भरा रहता है। ऐसे में छात्राओं की खेल कूद प्रतिभा दम तोड़ रही है। चाहकर भी वह किसी भी तरह की खेलकूद गतिविधियां का हिस्सा नहीं बन पा रहीं।
गणतंत्र दिवस पर जाहिर की पीड़ा
संस्थाप्रधान ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के सामने कहा कि समय रहते इस स्कूल को अन्य जगह स्थानांतरित करो। भवन की हालत काफी खराब है तथा दीवारों पर बढ़ती दरारों से कभी भी हादसा हो सकता है।
इनका कहना है...
विद्यालय भवन पूरी तरह से जर्जर है, बालिकाओं को बैठने में भी काफी असुविधा होती है। भवन पर आरही दरारें चिंता का विषय है। विद्यालय को शीघ्र ही अन्य स्थान या विद्यालय में स्थानान्तिरित कराने की आवश्यकता है। बालिकाओं व स्टाफ का जीवन कभी भी खतरे में पड़ सकता है।
-शैतानसिंह भाटी, प्रधानाचार्य, बालिका माध्यमिक विद्यालय, कुंवारिया
बालिका विद्यालय की स्थिति के बारे में जानकारी मिली है। शीघ्र ही प्रतिनिधि मण्डल को विद्यालय भेजकर समाधान का प्रयास निकाला जाएगा।
-भरतजोशी, जिलाशिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजसमंद





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