गंगापुरसिटी . आकोदिया गांव में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को पंडित बनवारीलाल शास्त्री ने कथा का अमृतपान कराया। शास्त्री ने कहा कि धन, धर्म के लिए है न कि भोग लिए। भोग जीवन के लिए है न कि इन्द्रियों की तृप्टि के लिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर को जानना ही तत्व को जानना है, जब तक सृष्टि रहेगी। ऐसे तत्व ज्ञानी ईश्वर के ज्ञान का उपदेश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत कथा किसी भी समय कहीं भी पढ़ी व सुनी जा सकती है।
हमारे धर्म में भागवत से बड़ा कोई ग्रंथ नहीं है। इससे पहले सोमवार को भागवत की अंतिम बोली गांव के ही रामकिशोर गुर्जर ने एक लाख इकसठ हजार रुपए में लगाकर भागवत सिर पर धारण की। कथा को लेकर भंडारा 4 फरवरी को होगा। इस दौरान ईश्वर सिंह, बाबूलाल, धर्मसिंह, चेतराम, केदार, रामस्वरूप, श्रीमोहन, गजानंद, सुबुद्धि, रामावतार आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
बड़ी उदेई . शहर की अग्रसेन कॉलोनी में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन मंगलवार को कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा वाचक आचार्य पंडित विष्णुकान्त शास्त्री ने कान्हा की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाते हुए कंस द्वारा कान्हा को मारने के लिए भेजे गई पूतना एवं तृणावत नामक राक्षसों के वध की कथा सुनाई।उन्होंने कहा कि बालक की प्रथम गुरु माता होती है। आचार्य ने बेटियों को पढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि पढ़ी लिखी बेटी अपने बच्चों में अच्छे संस्कार दे सकती है। इस मौके पर छप्पनभोग सजा कर कान्हा की सजीव झांकी सजाई गई।कथा में भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचने लगे। इस मौके पर यजमान बृजमोहन, लल्लूलाल अग्रवाल, राजेश, सुनील एवं विष्णु अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
भजन संध्या कल
आयोजन सदस्य भरतलाल ने बताया कि गुरुवार को श्रीश्याम परिवार सेवा समिति की ओर से भजन संध्या का कार्यक्रम होगा। इसमें जयपुर से पुरुषोत्तम बृजवासी एवं सवाई माधोपुर से रानू सैन भजनों की प्रस्तुति देंगे।
भागवत कथा 3 से
बड़ी उदेई . समीपवर्ती गांव गुर्जर बड़ौदा में स्थित भैरोजी मंदिर परिसर में 3 फरवरी से ग्रामीणों की ओर से सती माता की मूर्ति स्थापना एवं श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में कथावाचक आचार्य पंडित बालकृष्ण शास्त्री छोटी उदेई वाले होंगे।
बामनवास . गंडाल गांव में नसीर बाबा के स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य कमलेश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत के श्रवण मात्र से ही मानव को मोक्ष की प्राप्ति संभव है। ऐसे में प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में कम से कम सात कथाएं संपूर्ण रूप से सुनना आवश्यक है।
यह ग्रंथ संस्कार के साथ मानव को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि संसार में सत्य और असत्य नामक दो पथ भी संचालित हैं।सत्य पथ पर कठिनाई भले ही आए, लेकिन इसी मार्ग पर चलने वाले की जीत होती है। जबकि असत्य के मार्ग पर चलने वाली गाड़ी के ब्रेक कुछ दूरी पर चलकर लग जाते हैं। आचार्य ने श्रोताओं को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। पंचायत समिति सदस्य पवनबाई गुर्जर ने बताया कि प्रतिदिन कथा प्रवचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।





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