कोटा. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार मेहता की आने वाले दिनों मुश्किलें और बढऩे वाली है। यूआईटी में मेहता के कक्ष में दलालों में जमावड़ा लगा रहता था, जबकि आम आदमी की पहुंच मुश्किल थी।
एसीबी ने यूआईटी के कनिष्ठ अभियंता विमल माहेश्वरी को जनवरी २०१८ में पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। हरिओम नगर कच्ची बस्ती निवासी राजेन्द्र राठौड़ को मकान पर लोन लेना था। बैंक ने लोन देने से पहले यूआईटी से एनओसी लाने के कहा था। उसने फाइल एकल खिड़की पर जमा करा दी। उसके बाद फाइल जेईएन विमल माहेश्वरी के पास पहुंच गई। उन्होंने एनओसी देने के लिए ७ हजार रुपए मांगे, लेकिन ५ हजार रुपए पर सहमति हो जाने के बाद एसीबी ने जेईएन को ऑफिस से ही रिश्वत लेते पकड़ा था। न्यास में दलालों का खुलेआम खेल चल रहा था।
एसीबी की कार्रवाई से डरे हुए पूर्व अध्यक्ष रामकुमार मेहता ने अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने के लिए आम आदमी के प्रवेश पर पहरा लगा दिया था। गेट पर सुरक्षा गार्ड बिठा दिया था। आम आदमी को यूआईटी में जाने से पहले पूरा रिकॉर्ड इन्द्राज करवाना होता था। रजिस्ट्रर में मोबाइल नम्बर से लेकर मिलने का कारण तक बताना होता था। जबकि प्रापर्टी डीलर व दलाल वहां बिना एंट्री दर्ज किए दिनभर मंडराते रहते थे। ये लोग उनके चेम्बर में बने एक अन्य कमरे में बैठकर न्यास अध्यक्ष से चर्चा किया करते थे। इस दौरान वहां उनकी खातिरदारी की जाती थी। अगर दलाल जब चेम्बर में बैठे रहते थे तो आम लोगों को मिलने के लिए उनके चेम्बर के बाहर बैठा गार्ड अन्दर नहीं जाने देता जब तक वे बाहर नहीं निकल जाते।





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