पाली। आरटीइ के तहत पढऩे वाले बच्चों की पुनर्भरण राशि नहीं मिलने पर निजी स्कूल संचालक हायतौबा जरूर मचाते हैं, लेकिन वे स्वयं भी राशि लेने का इच्छुक कम ही लगते हैं। इसका उदाहरण है इस सत्र के दावा पत्र पेश करने की स्थिति। जिले में आरटीइ के तहत 635 स्कूल संचालित हैं। जिनमें 25 प्रतिशत नि:शुल्क विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन स्कूलों का भौतिक सत्यापन आदि भी हो चुका है, लेकिन अभी तक इनमें से शुल्क पुनर्भरण के लिए महज 360 स्कूलों ने ही दावा प्रपत्र पेश किए हैं। स्कूलों की इस लापरवाही का मजा सरकार ले रही है और उसकी तरफ से सत्र 2018-19 के प्रथम किस्त की राशि का बजट तक जारी नहीं किया गया है। जबकि सत्र की समाप्ति में अब चंद माह ही शेष रह गए हैं।
अटक सकता है राशि का भुगतान
विधासभा चुनाव से पहले निजी स्कूलों को शुल्क के पुनर्भरण राशि का बजट जारी किया गया था। उस समय आचार संहिता लगने पर चुनाव आयोग के निर्देशों पर स्कूलों को राशि दिए जाने पर रोक लगा दी गई थी। अब इस बार भी स्कूलों की ओर से दावा पत्र अभी तक पूरी तरह पेश नहीं किए गए हैं। इनके पेश होने के बाद यदि बजट जारी हो जाता है और लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई तो फिर से स्कूलों की पुरर्भरण राशि अटक सकती है।
भौतिक सत्यापन भी नहीं करवाया
निजी स्कूलों की लापरवाही का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन अभी तक नहीं हो पाया है। इसी कारण अब एक बार फिर इसका नया टाइम फ्रेम जारी किया गया है। जिससे निजी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन किया जा सके।
निजी स्कूलों के शुल्क पुनर्भरण की राशि के बजट के बारे में पता किया जाएगा। बजट नहीं आया है तो उस बारे में पत्र लिखकर बजट मंगवाया जाएगा।
ललित बिहारी माथुर, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक, मुख्यालय, पाली
जिले में अब तक ब्लॉकवार एडी देने वाले स्कूल
बाली 36
देसूरी 21
जैतारण 38
मारवाड़ जंक्शन 44
पाली 83
रायपुर 21
रानी 36
रोहट 18
सोजत 23
सुमेरपुर 40





No comments:
Post a Comment