दौसा. जिला मुख्यालय के लालसोट रोड जिला अस्पताल के सामने गरीबी में गुजर बसर कर रहे गरीब व असहाय परिवार को सहायता के लिए मंगलवार को सरकारी अधिकारी, जन प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। राजस्थान पत्रिका के 4 फरवरी के अंक में 'बुजुर्ग सास, नेत्रहीन बहू, गुजर-बसर हुआ मुश्किल Ó शीर्षक से खबर प्रकाशित होते ही जिला प्रशासन में तो हड़कम्प मचा ही साथ ही सामाजिक संगठन एवं जन प्रतिनिधि भी मदद के लिए आगे आ गए। मंगलवार को दिनभर इस गरीब परिवार की आर्थिक सहायता व सहायता का आश्वासन देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
लालसोट रोड पर रहने वाले इस गरीब परिवार के पास मंगलवार सुबह ही उपखण्ड अधिकारी डॉ. गोवर्धन लाल शर्मा पहुंचे। उपखण्ड अधिकारी ने बताया कि उन्होंने नगर परिषद आयुक्त को निर्देश दिए कि इस परिवार को प्रधानमंत्री आवास बनाने के लिए भूखण्ड आवंटित कर आवास बनाने के निर्देश दिए। वहीं अधीनस्थ अधिकारियों को इस परिवार का नाम खाद्य सुरक्षा सूची में जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कराने के भी निर्देश दिए। इसी प्रकार वार्ड पार्षद बाबूलाल जैमन ने भी पीडि़त परिवार को एक क्विंटल गेहूं व 21 सौ रुपए की आर्थिक सहायता मुहैया कराई। वहीं उन्होंने इस परिवार को 2 वर्ष तक प्रति माह 5 सौ रुपए देने का आश्वासन दिया। रोटरी कल्ब के प्रतिनिधि शिवशंकर सोनी व राजीव रावत भी गरीब परिवार के यहां आटा, दाल, तेल, कपड़े आदि लेेकर पहुंचे। इसी प्रकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सामाजिक सुरक्षा अधिकारी श्याम सुन्दर शर्मा, संरक्षण अधिकारी मनमोहन सिंह एवं छात्रावास अधीक्षक महेन्द्र कुमार शर्मा परिवार की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नेत्रहीन महिला के पुत्र रितिक को पालनहार योजना में लाभ दिलाने का आश्वासन दिया।
नहीं दिया किसी ने बिजली व गैस कनेक्शन आश्वासन : पड़ौस में रहने वाले धन्नालाल मीना ने बताया कि यह परिवार रात बिजली कनेक्शन के लिए रात अंधेरे में काटता है। गर्मियों में पसीजता रहता है। गैस कनेक्शन नहीं होने से चूल्हे की धुंआ होती है। परिवार की मुखिया अब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला गुलाब देवी के कंधों पर ही स्वयं, नेत्रहीन बहु गीतादेवी व नाबालिग पौत्र रितिक के पेट भरने की जिम्मेदारी है। इनके पास नल कनेक्शन भी नहीं है। पानी भी खरीदकर ही पीना पड़ रहा है।
दादा की मौत के बाद अकेली रह गई बालिका
गुढ़लिया-अरनिया. ग्राम पंचायत अरनिया की एक बेसहारा बालिका की सोमवार को प्रशासन ने मौके पर पहुंच सुध ली। इसके बाद बालिका को बालिका गृह दौसा ले गए। जानकारी के अनुसार कक्षा छह में अध्यनरत 11 वर्षीय बालिका निशा महावर के माता-पिता की काफी समय पहले मौत हो गई। इसके बाद वह अपने दादा के पास रहकर पढ़ाई कर रही थी, लेकिन गत 20 दिन पहले दादा खैरातीलाल की मौत हो जाने पर निशा अकेली रह गई। पालन-पोषण की भी कोई व्यवस्था नहीं होने से बालिका स्वयं को असहाय महसूस करने लगी। बालिका विद्यालय में भी मायूस रहने लगी। इस पर पंचायत शिक्षा अधिकारी बाबूलाल विजय ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इसके बाद सोमवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य एसपीसिंह, डॉ.सीमा जोशी, उमा रत्नू, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक मनोज आर्य, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी उदयसिंह अवाना, छात्रावास अधीक्षक अनुराग शर्मा, सचिन शर्मा, पंचायत समिति विकास अधिकारी मोहनसिंह, सहायक अभियंता नीतेश सैनी, ग्राम विकास अधिकारी नवीन अग्रवाल व कोलवा थाना प्रभारी बृजेश मीणा ने मौके पर पहुंच छात्रा के घर की स्थिति का अवलोकन किया। वहां कोई सहारा नहीं होने व असहाय महससू करने पर छात्रा को साथ ही ले गए और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास में रखकर पढ़ाई कराने का भरोसा दिलाया। इसके लिए आस-पड़ौस के लोगों व पंचायत प्रशासन से बालिका को ले जाने के लिए सहमति भी ली गई और बालिका ने भी जाने की इच्छा जताई। बताया जा रहा है कि बालिका को किसी भी योजना के तहत लाभान्वित भी नहीं किया गया। इस मौके पर उपसरपंच प्रेमचंद गुप्ता व कालू पाराशर भी मौजूद थे।





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