पाली . अपनों से बिछडऩे के करीब डेढ़ वर्ष बाद आठ साल की मासूम को आखिरकार परिजन मिल गए। अपनी लाडो को जिंदा देख परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। मां और चाची ने उसे गोद में लेकर खूब दुलार किया। साथ ही बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों का भी आभार जताया, जिनके प्रयासों से उन्हें फिर से लाडो मिल पाई। जबकि, वे तो हार मान चुके थे। बात दो अक्टूबर २०१७ की है। आबूरोड निवासी घुम्मकड़ जाति के जालाराम के घर सामाजिक कार्यक्रम था। घर में हंसी-खुशी का माहौल था। घर के बाहर ही उनकी बेटिया ज्योति अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। कुछ काम हुआ तो मां जनतादेवी ने ज्योति को बाहर जाकर ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। सभी ने मिलकर आस-पास ढूंढा लेकिन मासूम ज्योति का कोई पता नहीं चला। आखिरकार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इधर, मासूम ज्योति ट्रेन में बैठकर पाली की तरफ आ गई। उसे ट्रेन में रोता देख किसी यात्री ने जीआरपी को सूचना दी और पाली रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को सौंपा। चाइल्ड लाइन के जरिए ज्योति बाल कल्याण समिति के पास पहुंची। जहां समिति के सदस्य किशोर सोमनानी, सुदर्शन उदावत व मुन्नी वैष्णव ने उसकी देखभाल की। परिजनों के बारे में पूछा लेकिन तुतलाते हुए बोलने के बारे में वह अपने गांव व परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकी। ट्रेन में बैठने के बारे में पूछने पर बताया कि किसी ने उसे ट्रेन में बिठा दिया था, वह खुद नहीं बैठी। समिति के जरिए उसे राजकीय बालिका गृह जोधपुर भेजा गया। समिति ने अपने स्तर पर परिजनों का पता लगाने का प्रयास किया, जिससे आखिरकार उसे परिजन मिल गए।
सवाईमाधोपुर से जुड़े तार
जोधपुर बालिका गृह में ज्योति के रोने व बार-बार परिजनों के पास जाने की जिद्द की बात पता चली तो कुछ दिनों पूर्व बाल कल्याण समिति सदस्य किशोर सोमनानी व अन्य सदस्य जोधपुर गए। जहां फिर से उसे परिजनों के बारे में व उसके गांव के बारे में पूछा किया। तुतलाती आवाज में उसने सवाईमाधोपुर स्थित एक मंदिर की जानकारी दी। जिस पर सवाईमाधोपुर की बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। समिति पदाधिकारी बालिका के बताए मंदिर के पास पहुंचे तथा आस-पास के लोगों को फोटो दिखाकर पूछताछ की तो एक व्यक्ति ने बताया कि यह उनके रिश्तेदार की बेटी हैं ओर इसके परिजन आबूरोड में रहते है। इस पर आबूरोड पुलिस को जानकारी दी। इनके जरिए शुक्रवार शाम को ज्योति के परिजन पाली संप्रेक्षण गृह पहुंचे। जहां आवश्यक कार्रवाई के बाद ज्योति को उन्हें सौंपा।
घर नहीं पहुंचे मां-बेटे, गुमशुदगी दर्ज
रोहट. थाना क्षेत्र के जैतपुर गांव से मां-बेटे की गुमशुदगी रोहट थाने में दर्ज हुई है। पुलिस ने बताया कि जैतपुर निवासी गोबर पुत्र जोराराम बावरी ने रिपोर्ट दी कि उसकी पुत्री देवली का विवाह सात वर्ष पहले पलासना पाली निवासी चौथाराम पुत्र बुद्धाराम बावरी के साथ हुआ था। दो वर्ष के पुत्र गोपाल के साथ पीहर आई। २८ जनवरी को ससुराल जाने के लिए पुत्री देवली व उसके पुत्र गोपाल को बस में बैठाकर रवाना किया। लेकिन, शाम को दामाद चौथाराम ने फोन कर बताया कि देवली व गोपाल नहीं पहुंचे है। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की है।





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