शिरोधारा दो शब्दों से बना है शिरो (सिर), धारा (प्रवाह) यानी भू्र के मध्य स्थान से थोड़ा ऊपर ललाट पर किसी तरल पदार्थ को जब धारा के रूप में कुछ समय तक बिना रुके गिराया जाता है तो इसे शिरोधारा कहते हैं। शिरोधारा के लिए रोगी एवं रोग की प्रकृति के अनुसार औषधीय तेल, दूध या केवल पानी की धार का प्रयोग किया जाता है। शिरोधरा प्राकृतिक चिकित्सा विधि है।
प्रमुख लाभ : तनाव, अनिद्रा, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होने जैसी तकलीफों में शिरोधारा बहुत लाभकारी है। इससे मन को शांति मिलती है।
स्नायु से संबंधित रोग : कमजोर याददाश्त, चेहरे का लकवा, पुराना सिरदर्द, माइग्रेन, गहरी नींद न आना जैसी परेशानियों में यह बहुत फायदेमंद है। इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार होकर रूसी, बाल झड़ना या जल्दी सफेद होना, सिर की त्वचा का संक्रमण आदि में आराम मिलता है। लेकिन इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करें।





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