रक्तिम तिवारी/अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में घोषणाएं फिर फुस्स साबित हुई हैं। पूर्व कुलपति की कैंपस में ई-रिक्शा और साइकिल चलाने जैसी घोषणाएं कागजों में दब गई हैं। कुलपति के कामकाज पर रोक लगी हुई है। प्रशासनिक स्तर पर इन्हें अमली जामा पहनाना मुश्किल है।
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से कई भवन और छात्रावास दूर हैं। इसको देखते हुए पूर्व कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने मुख्य द्वार से ई-रिक्शा चलाने की योजना बनाई थी। ताकि विद्यार्थी अथवा आगुंतक कैंपस के किसी भी भवन तक पहुंचने में आसानी हो। इसके अलावा पूरे कैंपस को कार्बन फ्री सर्टिफिकेट दिलाने, भवनों में विद्युत खर्च कम करने के लिए सौर ऊर्जा पैनल लगाना तय हुआ। आधुनिक डिजाइन के भवनों को ईको फे्रंडली बनाने का प्रस्ताव भी बनाया गया।
बदले कुलपति, घोषणाएं दबी
प्रो. सिंह 19 जुलाई 2017 से 19 अप्रेल 2018 तक कार्यवाहक कुलपति रहे।उनके नौ महीने के कार्यकाल में योजनाएं अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। उनके बाद प्रो. विजय श्रीमाली कुलपति बने, लेकिन बीते साल 21 जुलाई को उनका निधन हो गया। करीब डेढ़ माह तक प्रो. कैलाश सोडाणी कार्यवाहक कुलपति रहे। उनके बाद कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के कार्यकाल पर हाईकोर्ट की रोक लगी हुई है। इसमें से सौर ऊर्जा पैनल को छोडक़र अन्य घोषणाएं कागजों में कैद हैं
कब बनाएंगे ऐसे कोर्स?
बाजार की मांग और त्वरित रोजगार के लिहाज से ज्यादातर संस्थानों के पाठ्यक्रमों में बदलाव पर भी प्रो. सिंह ने जोर दिया था। विश्वविद्यालय को ‘विद्यार्थी केंद्रित संस्थान ’ बनाने के तहत उन्होंने टॉपर विद्यार्थियों, उद्यमियों, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और शिक्षकों को बुलाकर पाठ्यक्रम तैयार कराने की योजना भी बनाई। यह पाठ्यक्रम बोर्ड ऑफ स्टडीज के जरिए एकेडेमिक कौंसिल में पारित कराना प्रस्तावित हुआ। लेकिन प्रस्ताव का अता-पता नहीं है।
नहीं बढ़ पाई खेल सुविधाएं
विश्वविद्यालय में खेल सुविधाएं बेहद खराब हैं। यहां 2009-10 से सचिन तेंदुलकर स्टेडियम का कामकाज ठप है। सांसद डॉ. रघु शर्मा ने इसका शिलान्यास किया था। विश्वविद्यालय नौ साल में स्टेडियम बनाना तो दूर एक ईंट भी नहीं लगा पाया है। एकलव्य खेल भवन भी बदहाल है। यहां इंडोर गेम्स की सुविधाएं नहीं हैं। स्टाफ कॉलोनी में प्रशासन ने लॉन टेनिस के दो कोर्ट तैयार कराए। दोनों कोर्ट बर्बाद हो चुके हैं।
करोड़ों के भवन बेकार
विश्वविद्यालय ने करोड़ों की लागत से मंगलम भवन और उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय प्रबंध केंद्र का छात्रावास भवन बनाया। दोनों भवन मौजूदा वक्त बेकार पड़े हैं। यही हाल कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक आवास, याज्ञवलक्य शोध भवन का है।





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