जयपुर. राजधानी में प्रतिबन्धित नशे की 90 फीसदी सामग्री चित्तौडगढ़़ या मध्यप्रदेश के मन्दसौर से आती है लेकिन जयपुर कमिश्नरेट पुलिस तस्करों को रोकने में फेल हो रही है। जयपुर सहित अन्य जिलों की पुलिस नाकाबन्दी भी बेअसर हो रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो चित्तौडगढ़़ और मन्दसौर में अफीम सहित नशे का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। राज्य के ज्यादातर स्थानों पर अफीम, चरस, स्मैक, हेरोइन, गांजा, डोडा-पोस्त इन्हीं स्थानों से पहुंचते हैं। जयपुर भी वहीं से नशे की सामग्री आ रही है।
ये हैं रास्ते
पहला : चित्तौडगढ़़ से तस्कर नशे की सामग्री लेकर अजमेर, किशनगढ़ होते हुए जयपुर पहुंचते हैं। इसी मार्ग से हरियाणा और पंजाब तक सप्लाइ होती है। चित्तौडगढ़़ से भीलवाड़ा, केकड़ी, मालपुरा, डिग्गी होते हुए भी तस्कर नशे की सामग्री जयपुर ला रहे हैं।
दूसरा : मध्यप्रदेश के मंदसौर से तस्कर कोटा, सवाईमाधोपुर, टोंक क्षेत्र में होते हुए जयपुर तक नशे की सामग्री लाते हैं।
केस बनाने के बजाय सीज करें दुकान
सबको पता है कि जयपुर में नशा मंदसौर और चित्तौडगढ़़ से आ रहा है। इन मार्गों पर सख्ती हो तो काबू पाया जा सकता है। नशे की प्रतिबन्धित सामग्री जहां भी मिले, दुकानदार पर केस बनाने की बजाय पूरी दुकान सीज करनी चाहिए। तस्करों, ऐसी सामग्री बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
रामजीवन मीणा, सेवानिवृत्त आइपीएस





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