जैसलमेर.चांधन फील्ड फायरिंग रेंज (जैसलमेर)से दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेनाओं की फेहरिस्त में शामिल भारतीय वायुसेना ने एयर पावर व युद्धक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए गुरुवार को जिले के चांधन फील्ड फायरिंग रेंज में दिन-रात के युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति-२०१९’ की फुल ड्रेस रिहर्सल को अंजाम दिया। इस मौके पर वायुसेना के उपप्रमुख एयर मार्शल अनिल खोसला पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएमएडीसी खास तौर पर मौजूद थे। दोपहर, शाम व रात के अलग-अलग हालात में वायु योद्धाओं ने हवाई ताकत दिखाई। आकाश में धूम -धड़ाका शुरू हो गया। शाम के धुंधलके व रात के अंधेरे में हुई बम वर्षा से जमीं पर रेत के गुबार उठे वहीं आसमां में विमानों की कलाबाजियों ने हैरत में डाल दिया। पायलट के इशारों के बीच युद्धाभ्यास से भारतीय वायुसेना के ९१ लड़ाकू विमानों ने हमला बोल दिया। इसमें अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोइ-३० एमकेआई, मिराज 2000, जगुआर, मिग-27, मिग-2१, तेजस, हॉक, एमआइ १७ वीएस, एमआइ ३५ और एएलएच एमके-४ विमानों ने भी जलवा दिखाया। ट्रां्रसपोर्ट वायुयानों में एएन-32, हरक्यूलिस सी- १३० और एईडब्ल्यृ एंड सी शामिल थे। इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्टम, काउंटर सरफेस फोर्सेज ऑपरेशन सर्च व रेस्क्यू ऑपरेशन का भी प्रदर्शन हुआ।
फैक्ट फाइल -
-१३७ विमान हुए युद्धाभ्यास में शामिल
-९१ लड़ाकू विमान बने युद्धाभ्यास का हिस्सा
-१० ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने भी एयर शो के दौरान दिखाए हवा में जौहर
- २१ सहायक विमानों की रही युद्धाभ्यास में भागीदारी
-3 वर्ष पहले भी चांधन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था आयरन फिस्ट का आयोजन
-२ घंटे आसमान में आकाशवीरों ने किया युद्धक क्षमता का प्रदर्शन
यह रहा आकर्षण
-युद्धाभ्यास में पहली बार आकाश मिसाइल ने लक्ष्य का भेदन किया। एरियल टारगेट पर निशाना साधा गया।
-पहली बार मिग २७ विमान ने हवा में प्रहारक क्षमता दिखाई।
-वायुसेना के युद्धाभ्यास में पहली बार पी-४ प्रेसीजन गाइडेड बम का प्रयोग हुआ।
-आकाशवीरों व विमानों के बीच रही श्रेष्ठता साबित करने की प्रतिस्पर्धा
-दुनिया की बेहतरीन हवाई मशीन में शुमार रूस निर्मित सुखोई-30 एमकेआइ, मिग-29, मिराज और जगुआर ने दिखाई प्रहारक व मारक दक्षता
- विदेशी विमानों के बीच स्वदेश तकनीक से विकसित तेजस के हल्के लड़ाकू विमानों ने भी साबित की क्षमता
-आकाश मिसाइल प्रणाली, रोहिणी राडार व इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के बीच शानदार तालमेल
-आयरन में गरुड़ कमांडो और स्पेशल हेली बॉर्न ऑपरेशन रहे कौतूहल का केन्द्र
-लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआइए की विश्वसनीयता, मिग- 29 की दुश्मनों को क्षण भर में नेस्तनाबूद करने की ताकत
-मिग- 29, जगुआर और मिराज की प्रहारक दक्षता
-हथियार बम से लेकर मिसाइल तक की क्षमताओं का आंकलन किया गया।
-कठोर प्रशिक्षण व भारतीय वायुसेना की प्रगति यात्रा और नए बदलाव को किया पेश
‘ऑन टाइम, ऑन टारगेट व एवरी टाइम’
एयर शो में ‘ऑन टाइम, ऑन टारगेट व एवरी टाइम’ की संकल्पना को मूर्त रूप देकर ‘शत्रु’ को नेस्तनाबूद करने को लेकर मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। यहां मिग 21, मिग 27, जगुआर, मिराज 200० से लेकर सुखोई 30 जैसे विमानों के अलावा हेलिकॉप्टर्स ने भी इस अभ्यास में हिस्सा लिया। एमआई-17 वी से लेकर एमआई-35 और एएलअटैक हेलिकॉप्टर जैसे हेलीकॉप्टर्स ने अपनी फौलादी क्षमता का प्रदर्शन किया।
बमों की बारिश, जमीन पर वार
फुल ड्रेस रिहर्सल में वायुसेना ने एयर मिसाइल सिस्टम व नए वायुयान पिलाटू पीसी एम के- 2 को भी शामिल किया। इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्टम, काउंटर सरफेस फोर्सेज ऑपरेशन सर्च व रेस्क्यू ऑपरेशन का भी सजीव प्रदर्शन किया। स्वदेशी लाइट का बेट एयरक्रा ट एलसीए तेजस के नाम से विख्यात रंग-बिरंगे ट्रेनर विमान पिलेट्स ने भी तीसरी बार प्रदर्शन किया।
थर्राई धरती, रोशनी से नहाए गांव
वायुसेना के विमानों ने मारक क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ हेलिकॉप्टर्स की ओर से युद्ध के समय व आपात स्थिति में राहत पहुंचाने के अलावा कम ऊंचाई से हमले करने की क्षमता को हजारों आंखों ने निहारा। आयोजन के बाद विमानों की ओर से छोड़े गए रोशनी बमों से रेंज के आसपास के गांव रोशनी से नहा उठे। आकाशवीरों ने आकाश से वार कर दुश्मनों का जैसे ही सफाया किया तो थार की धरा थर्रा उठी। तेज धमाकों के साथ रेगिस्तान में बम वर्षा और लड़ाकू विमानों के अचूक निशानों से ध्वस्त होते टारगेट को देखने वाली आंखें पलक झपकाना ही भूल गई।





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