अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. जंगल सफारी करने वालों की दिनों दिन संख्या घट रही है। सबसे ज्यादा कमी विदेशी मेहमानों की है। कुंभलगढ़ अभयारण्य में सैर करने वालों का आकड़ा जहां लगातार गिर रहा है वहीं रावलीटाडगढ़ की स्थिति और भी खराब हैं। पिछले पांच वर्ष में यहां मात्र 26 विदेशी मेहमान ही सफारी के लिए आए। वर्ष 2014-15 व 2017-18 में तो एक भी विदेशी मेहमान ने सफारी नहीं की। लगातार घट रहे विदेशी मेहमानों के पीछे सबसे बड़ा कारण सफारी मार्ग पर पैंथर, भालू व हिरण प्रजाति के वन्यजीवों का दिखाई नहीं देना बताया जा रहा है।
यह है वन्यजीव
कुंभलगढ़ और रावलीटाडगढ़ में एक दर्जन से अधिक प्रजाति के मांसाहारी तथा दो दर्जन से अधिक प्रजाति के शाकाहारी वन्यजीव हैं। जिसमें पैंथर, सियार, जरख, लोमड़ी, भेडिय़ा, बिल्ली, भालू, बिज्जू, नेवला साधारण, नेवला (कालीपूंछ), भारतीय लोमड़ी आदि मुख्य रूप से वन्यजीव गणना में दिखाई देते हैं। वहीं शाकाहारी में साम्भर, चिंकारा, चौसिंगा (भेडल), रोजड़ा, जंगली सूअर, सेही, लंगूर, खरगोश, चीतल सहित दो दर्जन से अधिक शाकाहारी वन्यजीव नजर आते हैं, लेकिन सफारी मार्ग पर यह दिखाई नहीं देने से पर्यटकों को निराशा होती है।
इसलिए सफारी में नहीं दिखते वन्यजीव
पिछले चार सालों में हुई वन्यजीव गणना में लोमड़ी को छोड़कर पैंथर, भालू, सहित अन्य मांसाहारी वन्यजीवों का कुनबा लगातार बढ़ा है। वहीं शाकाहारी जीवों में गिरावट देखी गई है। चीतल, खरगोश जंगल से गायब हो रहे हैं। ऐसे में जंगल में मांसाहारी जीव कम होने से शिकार नहीं मिलने पर पैंथर, भालू आदि आबादी की ओर आ रहे हैं, जिससे जंगल में इनकी उपलब्धता कम होने से यह सफारी मार्ग पर नजर नहीं आते। गौरतलब है कि वर्ष २०१७ की वन्यजीव गणना में १३६ तथा २०१८ में १७८ पैंथर नजर आए थे। इसीतरह भालुओं की संख्या भी बढ़तेक्रम में मिली थी।
सफारी क्षेत्र कुंभलगढ़
वर्ष देसी पर्यटक विदेशी पर्यटक
2013-14 6932 1524
2014-15 8704 1659
2015-16 14729 1122
2016-17 11139 574
2017-18 8995 559
योग 50499 4908
सफारी क्षेत्र रावलीटाडगढ़
वर्ष देसी पर्यटक विदेशी पर्यटक
2013-14 3333 21
2014-15 1464 0
2015-16 7283 2
2016-17 7888 0
2017-18 7429 ३
योग 30097 26
...फिर क्या देखे पर्यटक
पर्यटक जंगल में वन्यजीवों को देखने के लिए जाता है। कुंभलगढ़ और रावलीटाडगढ़ के जंगल में मैंने भी कईबार सफारी की है लेकिन पैंथर, भालू तो दूर की बात यहां हिरण प्रजाति के वन्यजीव भी नजर नहीं आते। ऐसे में पर्यटक ठगा सा महसूस करता है। हम अन्य जगह सफारी के लिए जाते हैं तो अगर पैंथर, भालू, बाघ जैसे बड़े वन्यजीव नहीं दिखते तो सांभर, हिरण आदि का झुंड दिखता है। यहां समय-समय पर शाकाहारी वन्यजीवों लाकर छोडऩा चाहिए। इससे निश्चित ही पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
-हिमांशुसिंह चंद्रावत, सफारी पर्यटक
जंगलों में बढ़ाएंगे सुविधाएं...
पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए अभयारण्य क्षेत्र में 20 जगह हमने दूरबीन लगवाई है, यहां से पर्यटक वन्यजीवों, पक्षियों आदि को देख सकता है। शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या जंगल में और विकसित हो इसके भी प्रयास किए करेंगे।
-फतेहसिंह राठौड़, डीएफओ वन्यजीव मंडल, राजसमंद





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