राजसमंद. नगर परिषद की 2019-20 की बजट बैठक बुधवार को परिषद सभागार में हुई। बैठक परिषद की आय घटने, नए स्रोतों को तलाशने में सुस्ती और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच 39 मिनट में भारी हंगामे के साथ खत्म हो गई। कमीशनखोरी के आरोपों से खफा सभापति सुरेश पालीवाल बैठक खत्म करने की घोषणा कर उठकर सदन से चले गए। आरोपों से आहत सभापति फफक पड़े। उनकी आंखें भर आईं। पिछले वर्ष एक अरब 25 करोड़ 52 लाख 20 हजार रुपए का बजट पारित हुआ था, जिसमें इस बार तीन करोड़ 80 लाख 98 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई। बैठक की शुरुआत में सभापति पालीवाल ने बजट प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। कांग्रेस पार्षद रोहित पंचोली ने निजी आय बढ़ाने के उपायों पर सवाल किए। परिषद की आय पिछले वर्ष के मुकाबले घटने पर पंचोली ने जवाब मांगा कि ऐसा क्यों हुआ? उन्होंने आय के भ्रष्टाचार की भेंट चढऩे का आरोप जड़ दिया। इस पर सदन में हंगामा खड़ा हो गया। भाजपा पार्षद हिम्मत मेहता ने आय में घटत-बढ़त को स्वाभाविक बताते हुए सभापति का बचाव किया।
सामुदायिक भवनों का पैसा निजी समितियां डकार रहीं
पार्षद पंचोली ने कहा कि नगर परिषद क्षेत्र में करीब छह दर्जन सामुदायिक भवन हैं। इनसे आय बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव अब तक नहीं है। इन भवनों की चाबियां किसके पास हैं, इसका भी परिषद को पता नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में निजी कमेटियां इन सामुदायिक भवनों में कार्यक्रमों के नाम पर 11000 वसूल रही है।





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