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अंधेरी नगरी चौपट राजा...मंत्री जी पर भारी पड़े प्रोफेसर साहब, सरकार की फजीहत कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे ...

कोटा. आरटीयू के एक प्रोफेसर के आगे तकनीकी शिक्षा मंत्री और विश्वविद्यालय की कुलपति तक बौने साबित हो गए। अफसरों में प्रोफेसर की पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंत्री और कुलपति की रोक के बावजूद शासन सचिव तकनीकी शिक्षा ने बैठक के लिए जयपुर बुला लिया। रजिस्ट्रार ने जब कुलपति से इजाजत मांगी तो उन्होंने प्रो. राजेश सिंघल के जयपुर जाने पर रोक लगा दी।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे के आला अफसर सरकार की फजीहत कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे। तकनीकी शिक्षा भवन में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) का नोडल सेंटर स्थापित करने के नाम पर लगभग पूरा विवि शिफ्ट करने का खाका खींच चुके अफसर 20 फरवरी को इसका उद्घाटन कराने की तैयारियों में जुटे हैं। इतना ही नहीं नोडल सेंटर के संचालन और तौर तरीकों पर चर्चा करने के लिए शासन सचिव वैभव गालरिया ने शुक्रवार को आरटीयू की रजिस्ट्रार डॉ. आभा जैन और नोडल अधिकारी प्रो. राजेश सिंघल को बैठक के लिए बुलाया है, जबकि तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग नोडल अधिकारी के तौर पर प्रो. सिंघल की नियुक्ति के प्रस्ताव को रद्द कर उन्हें पूरी प्रक्रिया से बाहर कर चुके हैं।

कुलपति ने भी लगाई रोक

बावजूद इसके प्रो. सिंघल के साथ शासन सचिव की बैठक में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रार डॉ. आभा जैन ने गुरुवार को कार्यवाहक कुलपति प्रो. नीलिमा सिंह से इजाजत मांगी। कुलपति ने इस बाबत जब रजिस्ट्रार से आदेश मांगे तो उन्होंने शासन सचिव द्वारा मौखिक निर्देश दिए जाने की बात कही। इस पर कुलपति ने सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश नहीं आने तक प्रो. सिंघल के बैठक में शामिल होने पर रोक लगा दी।

काट दिया था प्रो. सिंघल का नाम
तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने बताया कि आरटीयू के अफसरों ने नोडल सेंटर का इंचार्ज बनाने के लिए प्रो. राजेश सिंघल का नाम भेजा था। इसे वह पहले ही काट चुके हैं। नोडल अधिकारी के तौर पर उनकी नियुक्ति को सरकार ने कोई मंजूरी नहीं दी। इसके बाद भी उनकी नियुक्ति का कोई आदेश निकला है तो वह विवि अफसरों का काम है।



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