रायपुर मारवाड़. हमारे गांव की मुख्य सम्पर्क सडक़ मरम्मत के अभाव में पहले से ही बदहाली की शिकार थी। अब बजरी माफिया ने अपने अवैध व्यापार के लिए इस सडक़ का उपयोग शुरू कर दिया है। बजरी से लदे ओवरलोड़ डम्पर रोजाना रात को इसी सडक़ पर सरपट गुजरते हैं। इससे अब ये सडक़ जगह जगह से टूटकर बिखर चुकी है। न तो डम्पर बंद हो रहे हैं न ही जिम्मेदार ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में इस मार्ग पर रोजाना हादसे हो रहे हैं। यह व्यथा गिरी व बिराटिया खुर्द के ग्रामीणों की है। उन्होंने सयुक्त रूप से मुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री को पत्र भेज हालात से रूबरू कराते हुए प्रभावी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
बजट की राह में बीत गए कई बरस
बर से बिराटिया खुर्द होकर गिरी की ओर जाने वाले इस 13 किलोमीटर के सम्पर्क सडक़ मार्ग की कई सालों से मरम्मत तक नहीं हुई है। जिससे ये सडक़ टूटती रही। अब ओवरलोड डम्पर की निरंतर आवाजाही से सडक़ के दोनों तरफ के हिस्से टूटकर गहरे गड्ढे में तब्दील हो गए है। इस मार्ग पर कई जगह सडक़ किनारे गड्ढे होने से दुपहिया वाहन चालक हादसे के शिकार हो रहे हैं जबकि चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
जा चुकी कई जानें
इस मार्ग पर बीते दो साल की बात करें तो दो दर्जन से अधिक हादसों में 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। गिरी सरपंच सुमित्रा चौहान व बिराटिया खुर्द सरपंच मीनू कंवर राठौड़ सडक़ निर्माण व ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारों से मांग कर चुके है, लेकिन आज तक न तो सडक़ की मरम्मत हुई न ही ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।
मेले के समय मरम्मत की औपचारिकता
बिराटिया खुर्द में हर साल बाबा रामदेव का भव्य मेला भरता है। इस मेले को लेकर जब बिराटिया खुर्द सरपंच ने मांग उठाई तब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बर से बिराटिया खुर्द तक पेचवर्क करवा दिया गया। जो मेले के कुछ दिनों बाद ही जवाब दे गया।
किसी को परवाह नहीं
हमारे गांव की सम्पर्क सडक़ की बदहाली से जिम्मेदारों को कोई सरोकार नहीं रहा है। जगह जगह से टूटी सडक़ हादसों का कारण बन चुकी है। बजरी के ओवरलोड डम्पर रोजाना गुजर रहे हैं कोई रोकने वाला नहीं है। हमने मुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री को पत्र भेज कार्रवाई की मांग की है।
ललित गुलेच्छा, समाजसेवी, गिरी
स्वीकृति नहीं मिली
हमारे इस मार्ग के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। अभी तक स्वीकृति मिली नहीं है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करवा देंगे।
ज्ञानाराम परिहार, एईएन, पीडब्ल्यूडी, रायपुर





No comments:
Post a Comment