Breaking News
recent

विश्व धरोहर मेनाल झरने के सामने मंदिर में  महिलाएं नहीं लगा सकती परिक्रमा


नरेन्द्र वर्मा. भीलवाड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला के प्रवेश की राह सितंबर 2018 में खोल दी, लेकिन विश्व प्रसिद्ध मेनाल झरने के मुख्य गेट के सामने बालाजी मंदिर में महिलाएं प्रवेश तो कर सकती हैं, लेकिन परिक्रमा नहीं लगा सकती। महिला श्रद्धालुओं के यहां परिक्रमा लगाने की कोशिश करने पर उन्हें रोक दिया जाता है।

 

भीलवाड़ा वन मण्डल के अधीन एवं चित्तौडग़ढ़ जिले की सीमा में मेनाल झरने पर पर्यटकों की आवाजाही रहती है। ग्रीष्मकालीन, बारिश व दीपावली की छुट्टियों के दौरान अधिक भीड़ रहती है। यहां देश-विदेश के पर्यटक आते हैं। मेनाल झरने के मुख्यद्वार पर स्थित मेनाल बालाजी मंदिर आज भी एक परम्परा कायम है। मंदिर में महिलाएं दर्शन कर सकती हैं, लेकिन परिक्रमा नहीं कर सकती। कोई कोशिश भी करती है, तो मंदिर की सेवा में जुटे लोग, पुजारी व उनके परिजन उनको रोक देते हैं।


सबरीमाला में राह खुली तो यहां क्यों नहीं
तमिलनाडु से परिवार के साथ आई पी. चिरवल्ली स्वामी, गुजरात की मीनाक्षी बेन व लक्ष्मीराज सैती का कहना था कोर्ट के फैसले से सबरीमाला में महिलाओं के लिए सालों से बंद पड़े ताले खुल गए, तो यहां महिलाओं को परिक्रमा से रोकना अनुचित है।


निभा रहे पुरानी परम्परा
मेनाल बालजी मंदिर ट्रस्ट संरक्षक सूरजमल मीणा बताते हैं कि मंदिर सातवीं सदी का है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक नहीं है, लेकिन परिक्रमा नहीं कर सकती। यह व्यवस्था शास्त्रों के अनुसार है। हालांकि यह परम्परा किस शास्त्र या खास घटना के अनुसार प्रचलित है, वे नहीं बता सके।

 

मंदिर व्यवस्थापक रामस्वरूप लखारा बताते हैं कि सदियों पहले यह स्थल एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे हुआ करता था। बाद में यहां मंदिर बनाया गया। यह चामत्कारिक स्थल है। मंदिर सभी के लिए खुला हुआ है, लेकिन महिलाओं के लिए परिक्रमा पर मनाही है। मंदिर के पुजारी वेदराज बताते हैं कि उनके पिता व दादा, परदादा के जमाने की यह परम्परा है। मंदिर क्षेत्र की इन्द्रा देवी यहां की इस परम्परा की पक्षधर हैं। उनका कहना है कि बड़े-बुजुर्गों की बनाई हुई परम्परा है और इसकी पालना करते आ रही है।

यहां आते हैं कई बड़े-बड़े लोग
पर्यटक महेन्द्र मीणा बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना यहां भी सुनिश्चित होनी चाहिए। मंदिर की महत्ता इस लिए भी बढ़ जाती है कि यह विश्व धरोहर मेनाल झरने पर है। यहां देश एवं विदेश के पर्यटकों के साथ ही आला अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी आते हैं।

 

मंदिर में परिक्रमा करने से रोकना महिलाओं के संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का हनन है। सबको पूजा करने का अधिकार है। एेसा है, तो तत्काल इसे बंद करना चाहिए।
लाडदेवी जैन, पूर्व अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.