बौंली. मनुष्य का शरीर स्नान करने से नहीं, बल्कि सेवा करने से शुद्ध होता है। मन में भगवान का ध्यान करने से शुद्ध होता है। यह बात शिव बगीचे में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक अमृतराम महाराज ने कही।उन्होंने कहा कि सैकड़ों कार्य छोड़कर भोजन करो, हजारों काम छोड़ कर स्नान करो, एक लाख काम छोड़कर अतिथि की सेवा करो और करोड़ काम छोड़कर भगवान के भजन करो। कथा में बताया कि भगवान के दो स्वरूप है निर्गुण निराकर, सगुण साकार जैसे तीन तत्वों प्रोटोन ,न्यूट्रॉन , इलेक्ट्रॉन मिलकर जीव बनता है। उसी प्रकार आध्यात्मिक रूप से तमोगुण, रजोगुण व सतोगुण से संसार बनता है । इस दौरान नंद उत्सव, गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान गोवर्धन भगवान के छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। कथा में आसपास के ग्रामीणों सहित कस्बे के महिला-पुरुष मौजूद रहे।
हनुमंत प्रतिष्ठा व भागवत कथा महोत्सव 10 से
बाटोदा. कस्बे के दरवाजे वाले बालाजी की हथाई पर 10 फरवरी से हनुमंत प्रतिष्ठा व भागवत कथा महोत्सव का आयोजन होगा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि दरवाजे वाले मंदिर पर नवीन रूप से हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करने के क्रम में भागवत कथा सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसमें 10 फरवरी को कथा वाचक पंडित छैलबिहारी शास्त्री के सानिध्य में शिव मंदिर बोहराजी तालाब से कलश यात्रा व भागवत कथा की नगर परिक्रमा निकालने के बाद गणेश पूजन होगा। वहीं 11 फरवरी को बालाजी की प्रतिमा प्रतिष्ठा शुरू होगी। 16 फरवरी को व्यास पूजन व पूर्णाहुति, 17 को भंडारे का आयोजन होगा।





No comments:
Post a Comment