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सुनो प्रधानमंत्री जी...


पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को मिले मंजूरी
पूर्वी राजस्थान के 9 संसदीय क्षेत्रों झालावाड़-बारां, कोटी-बूंदी, टोंक-सवाई माधोपुर, अजमेर, जयपुर ग्रामीण व जयपुर शहर, दौसा, करौली-धौलपुर व अलवर भरतपुर की प्यास बुझाने वाली पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को मंजूरी दिए जाकर इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने पर पेयजल की समस्या का समाधान होगा।


13 जिलों की प्यास बुझाएगी
यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की प्यास बुझाने वाली है, जिसमें चम्बल बेसिन की पार्वती, कालसिंध, कुन्नू, कुल, मेज व चाकन नदियों को बनास, मोरेल, बाणगंगा और गंभीर नदियों से जोड़ कर इनके अधिशेष पानी से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिलों को पीने का पानी मिलने के साथ ही दो लाख हैक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा। केन्द्रीय जल आयोग की मंजूरी से वेपकोस लिमिटेड कम्पनी द्वारा परियोजना का विस्तृत सर्वे कर डीपीआर तैयार की गई है, बस घोषणा किया जाना बाकि है। हालांकि इस परियोजना को मंजूरी प्रदान करने बाबत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 अक्टूबर को अजमेर एवं सितम्बर 2018 में जयपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे की मांग पर मंजूरी देने का आश्वासन दे चुके।


रेल प्रोजेक्ट: चाहिए महज 873 करोड़
सात दशक से चली आ टोंक में रेल की मांग केन्द्र व राज्य के बीच फुटबॉल बनी हुई है, जबकि रेल विभाग ने चौथ का बरवाड़ा से नसीराबाद तब तक बिछाई जाने वाली रेल लाइन का सर्वे पूरा कर लिया है। इस सर्वे के बाद अब महज जमीन मिलने के बाद रेल लाइन बिछाने का ही कार्य शुरू होना है, लेकिन अब भी तक राज्य सरकार ने जमीन अधिकृत नहीं की है। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी तो टोंक को रेल से जोडऩे की बात सपना ही बन जाएगी। इस परियोजना की कुल लम्बाई165 किलोमीटर है। इसके लिए अनुमानित 873.71 करोड़ रुपए खर्च होगा। स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है।


जिले में खुले मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार ने गत बजट में जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई थी लेकिन जमीन ही आवंटित नहीं की गई। ऐसे में जिलेवासियों को नई सरकार से जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण काम शुरू कराने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सेवाओं के साथ रोजगार के अवसरों की वृद्धि होगी।


आमली सफारी पार्क
राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने व बाघों के संरक्षण 2013 में वन क्षेत्र में सरकारी पार्क विकसित करने की घोषणा की थी। बाद में इस प्रोजेक्ट की डीपीआर ही अटक गई।


सवाईमाधोपुर-जयपुर रेललाइन का दोहरीकरण का काम अब तक अधूरा
सालों से सवाईमाधोपुर-जयपुर के बीच रेललाइन का दोहरीकरण व विद्युतीकरण की मांग की जा रही है। रेल विभाग की अनदेखी से अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। जबकि वित्तिय स्वीकृति जारी हो चुकी है। दोहरीकरण व विद्युतिकरण से इससे जयपुर जाने वाले यात्रियों को सुविधा होने के साथ पर्यटन भी बढ़ेगा। ट्रेनों की गति में भी इजाफा होगा।


राष्ट्रीय उद्यान में विकसित किए जाए
नए जोन रणथम्भौर में वर्तमान में दस जोनों में पर्यटन किया जा रहा है। विभाग ने दो साल पहले झूमर बावड़ी, भदलाव आदि वनक्षेेत्र में पर्यटन जोन विकसित करने का प्रस्ताव बनाया था। जोन के रास्तों का भी निर्माण कर लिया गया था लेकिन अब तक रणथम्भौर में नया जोन शुरू नहीं हो पाया है। ये विकसित होने से वाहनों का दबाव भी कम होगा।


लोकसभा क्षेत्र का घोषणा-पत्र
टोंक-सवाई माधोपुर में बेरोजगारी दूर करने के लिए बड़ी व राष्ट्रीय स्तर की औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाए।क्षेत्र के शहर, कस्बों एवं गांवों में प्रतिदिन स्वच्छ पेयजल सुलभ हो।टोंक को रेल लाइन से जोड़ा जाए और सवाई-जयपुर रेल लाइन का दोहरीकरण व विद्युतीकरण कार्य शुरू करवाया जाए।सवाई माधोपुर में मेडिकल कॉलेज की घोषणा पर क्रियान्विति हो। साथ टोंक में भी मेडिकल कॉलेज खोला जाए।पर्यटक स्थलों को विकसित करने को लेकर टयूरिज्म जोन बनाया जाकर सुविधाएं विकसित की जाए।बाघों के संरक्षण 2013 में वन क्षेत्र में सरकारी पार्क विकसित करने की घोषणा की थी। आमली सफारी पार्क योजना को गति
दी जाए।तकनीकी क्षेत्र के उच्च शिक्षण संस्थान खोले जाए।बीसलपुर कन्जरर्वेशन योजना का बजट जारी किया जाए।देवली में सैनिक स्कूल खोला जाए।

पर्यटन स्थानों को पहचान मिलेउम्मीदों को मिले आयाम
टोंक. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा राजस्थान में लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार का आगाज टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में टोंक में सभा कर किया जा रहा है। जिले में कई ऐसे प्रोजेक्ट है, जिन्हें काफी प्रयासों के बाद भी धरातल का आयाम नहीं मिला है। लोगों को आस है कि उनकी बरसों से चली आ रही मांगे प्रधानमंत्री पूरा कर क्षेत्र एवं राज्य के विकास को नई दिशा देंगे।


हम्मीर संग्रहालय की मांग हो जाए पूरी
रणथम्भौर दुर्ग का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के शासक हम्मीर देव विश्व प्रसिद्ध है। सालों से रणथम्भौर दुर्ग में हम्मीर संग्रहालय खोलने की मांग की जा रही है। रणथम्भौर विकास समिति की ओर से कई बार इस संबंध में जिला कलक्टर के माध्यम से पुरातत्व विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि रणथम्भौर को पूर्व में यूनेस्कों की ओर से विश्व धरोहर में शामिल किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस दिशा में प्रयास किए जाए तो शहर के लोगों को रणथम्भौर के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकेगी।


हब बने धार्मिक पर्यटन हब
जिले के शिवाड़ कस्बे में घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ो पर्यटक व श्रद्धालु भ्रमण के लिए आते है। लेकिन यहां अब तक सरकार की ओर से कोई विकास कार्य नहीं कराए गए, न ही इसे धार्मिक पर्यटक स्थलों में शामिल किया गया। नए साल में यदि शिवाड़ को धार्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा दिया जाता है, तो यह स्थानीय लोगों के लिए खुशखबर होगी।



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