सवाईमाधेापुर। रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में बुधवार शाम को बाघ पेकमैन टी-85 का शव सड़ी हालत में खण्डार रेंज इलाके में मिला है। बाघ का पेट व शरीर के अन्य अंग फूले हुए थे। शव दो से तीन दिन पुराना होने की आशंका जताई जा है। इससे वन विभाग की टे्रकिंग व मॉनिटरिंग पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि बाघ का शव इंडाला चौकी से मात्र आठ किलोमीटर दूर रोड पर ही पड़ा था।
वन विभाग के अनुसार खटोला के निकट इंडाला वन क्षेत्र में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पानी लेने जाते समय वनकर्मी संतोष को बाघ का शव नजर आया। बाघ के शव के पास ही खून बिखरा था व दोनों ओर खरोंच के निशान थे। गर्दन में भी चोट के निशान मिले हैं। वन अधिकारियों का प्रथम दृष्टया मानना है कि किसी अन्य बाघ के साथ संघर्ष में उसकी मौत हुई है। इससे संघर्ष में अन्य बाघ के भी घायल होने की आशंका है। वन अधिकारियों ने बताया कि रात करीब दस बजे बाघ के शव को जंगल से बाहर लाया गया। शव को राजबाग चौकी पर रखवाया गया है। अब गुरुवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
करीब 5 साल का था
वनाधिकारियों ने बताया कि बाघ पैकमैन की उम्र करीब पांच साल है। बाघ पर्यटकों को पहली बार फरवरी 2014 में नजर आया था। हालांकि लम्बे समय से यह रणथम्भौर में पर्यटकों व वनकर्मियों को पेकमैन का रणथम्भौर की रानी टी-16 मछली से नाता रहा है। पेकमैन बाघिन टी-19 कृष्णा की संतान है। जबकि कृष्णा, मछली की बेटी है।
जांच की मांग
रणथम्भौर बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता अक्षय शर्मा कहना है कि बाघ का शव रोड पर होने के बावजूद वनकर्मियों को दो से तीन दिन बाद पता चला है। बाघ के शव को देखकर लगता है कि मॉनिटरिंग में खामी है। घने जंगल में शव होता तो उसको पता ही नहीं चलता। इसकी जांच होनी चाहिए।
खण्डार के खटोला में कुण्डेला के पास बाघ का शव मिला है। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम कराया जाएगा। शव मंगलवार रात का होने का अनुमान है।
मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर





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