सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर की खण्डार रेंज के इंडाला में बुधवार रात को मिले बाघ टी-85 पैकमैन के शव का गुरुवार को खण्डार मार्ग पर स्थित राजबाग चौकी वन क्षेत्र में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद वन अधिकारियों ने पुलिस व जिला प्रशासन की मौजूदगी में राजबाग वन क्षेत्र में बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया।
सिर व आंख के पास आई चोट
बाघ का पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि बाघ के सिर व बांई आंख के पास चोट के निशान थे। वहीं शरीर में दोनों ओर खरोंचे भी मिली है।
ये रहे मौजूद
बाघ के पोस्टमार्टम के दौरान पशु चिकित्सक राजीव गर्ग, उपवन संरक्षक मुकेश सैनी, सीसीएफ मनोज पाराशर तहसीलदार मनीराम खीचड़ आदि मौजूद थे।
बाघ की मौत के बाद जागा विभाग, निगरानी के लिए लगाए कैमरे
रणथम्भौर में खण्डार रेंज के इंडेला वन क्षेत्र में बाघ टी-85 पैकमैन का शव मिलने के बाद अब वन विभाग की नींद टूट गई है। विभाग की ओर से अब इंडेला वन क्षेत्र में बाघों की निगरानी के लिए फोटो ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। कुल दस फोटो ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
निगरानी के लिए गठित की टीमें
विभाग की ओर से बाघ की निगरानी के लिए अब संबंधित क्षेत्र में तीन टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में पांच सदस्य नियुक्त किए गए हैं। वन अधिकारियों ने बताया कि एक टीम खण्डार क्षेत्र के रेंज ऑफिसर के नेतृत्व में एक टीम फील्ड बॉयोलोजिस्ट गिरीश पंजाबी के नेतृत्व में व एक टीम रेसक्यु टीम प्रभारी राजवीर सिंह के नेतृत्व में संघर्ष में घायल हुए दूसरे बाघ की टै्रकिंग में जुटी हुई है।
यूं चला घटनाक्रम...
10.00 बजे पशु चिकित्सक पहुंचे मौके पर
10.10 मिनट पर उपवन संरक्षक मुकेश सैनी व एसीएफ संजीव शर्मा पहुंचे
10.30 मिनट पर सीसीएफ मनोज पाराशर पहुंचे
10.45 पर शुरू हुआ पोस्टमार्टम
11.40 तक चली पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
12.05 पर किया गया बाघ का अंतिम संस्कार
घायल बाघ कौनसा है इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। टे्रकिंग के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। बाघ की लगातार टे्रकिंग कराई जा रही है।
संजीव शर्मा, एसीएफ , रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर
फेफड़ों में अंदरूनी चोट, मेम्ब्रेन भी फटी
पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉ राजीव गर्ग ने बताया कि बाघ की मौत फेफड़े में अंदरुनी चोट लगने से हुई है। इसके अलावा उसके हृदय में मेम्ब्रेन भी फटी हुई थी। इस कारण उसकी मौत हुई। इसके अलावा उसके मुंह, पैरों पर भी दूसरे वन्यजीव के दांतों से घायल करने के निशान मिले हैं। संघर्ष के दौरान मुंह पर हुए घावोंमें कीड़े भी लगने शुरू हो गए थे। शव करीब 25 से 28 घंटे पुराना था। बाघ का विसरा भरतपुर भेजा जाएगा व डीएनए टेस्ट के लिए नमूना देहरादून भेजा जाएगा। मेडिकल बोर्ड में डॉ रमेशचंद मीणा, राजकुमार अग्रवाल भी शामिल थे। इधर, जानकारों के अनुसार बाघ का शव करीब दो दिन पुराना होने का अनुमान है। उनका कहना है कि वन्यजीव के शरीर में 24 घंटे में कीड़े नहीं पड़ सकते।
यह दो बाघों में आपसी संघर्ष का मामला है। रणथम्भौर में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में टेरेटरी को लेकर संघर्ष हो रहा है। इसमें दूसरा बाघ भी घायल हुआ है। अभी तक दूसरे बाघ की पहचान नहीं हो सकी है। इसके लगातार ट्रेकिंग कराई जा रही है।
मनोज पाराशर, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।
इन बाघों का रहता है मूवमेंट
वन अधिकारियों ने बताया कि जिस क्षेत्र में बाघ के साथ संघर्ष में पैकमैन की मौत हुई है। वहां अन्य कई बाघों का भी विचरण रहता है। अधिकतर वहां दो बाघों का मूवमेंट मिलता है। इनमें टी-20 व टी-23 प्रमुख है। हालांकि कुछ दिनों से उस इलाके में टी-96 की भी पदचाप बनी हुई है। विभाग किसी नर बाघ के साथ संघर्ष मानकर चल रहा है, लेकिन कैमरों में फोटो कैद होने के बाद ही कौनसा बाघ है इसकी पुष्टि की जा सकेगी।
बाघों के दर्द से अनजान लाइटनिंग के सेही के कांटे लगने पर भी नहीं चला था पता पुराना लग रहा था शव विभाग रहा बाघ की मौत से अंजान
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर की खण्डार रेंज के इण्डेला वन क्षेत्र में बाघ टी-85 यानि पैकमैन के शव मिलने के बाद एक बार फिर से विभाग के टै्रकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग की ओर से बाघ व अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन बाघ की मौत की सूचना भी सही समय पर नहीं मिल सकी। यह कोई पहली बार नहीं है जब विभाग को बाघ बाघिनों की पीड़ा देरी से पता चली है। इससे पहले भी कई बार विभाग बेखबर रहा है। पूर्व में बाघिन लाइटनिंग के सेही के कांटे लगने के मामले में भी विभाग को कई दिनों के बाद जानकारी मिल सकी थी।
दो कांटे लगे थे : रणथम्भौर में बाघिन लाइटनिंग को सेही के कांटे लगे हुए थे कांटे बाघिन के दोनों पैरों के बीच गर्दन में फंसे हुए थे, लेकिन विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं थी। बाघिन दर्द से कराह रही थी।
तब पर्यटकों ने दी थी सूचना : बाघिन के कांटे लगे होने के मामले में उस समय शाम की पारी में पार्क भ्रमण पर गए पर्यटकों ने बाघिन की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की थीं। इसके बाद पर्यटकों को तस्वीरों में बाघिन के गले में सेही के कांटे लगे नजर आए थे। पर्यटकों ने वन अघिकारियों को बाघिन की हालत के बारे में जानकारी दी। इसके बाद वन अधिकारियों ने बाघिन को ट्रेकुंलाइज कर गले से कांटे निकाले थे।
बाघ-बाघिनों की प्रभावी मॉनिटरिंग कराई जाती है, लेकिन कई बार कुछ चीजें फोटो आदि के अभाव में देर से स्पष्ट हो पाती हैं। बाघ की मौत के बाद अब क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग कराई जा रही है।
मुकेश सैनी, डीएफओ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।





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