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फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने उठाए ये कदम

सीकर.

महिला एवं बाल विकास विभाग की एनटीटी परीक्षा से पहले दस्तावेजों की जांच की सूचना से अभ्यर्थियों में हडकम्प मचा हुआ है। पिछले दिनों अभ्यर्थियों ने दूसरे राज्यों की अंकतालिकाओं के सहारे परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की जांच की मांग की थी। इसके बाद अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने परीक्षा को भी स्थगित कर दिया था। प्रदेश से एनटीटी करने वाले अभ्यर्थियों ने बाहरी राज्यों की अंकतालिकों की पहले जांच कराने की मांग की है। दावा है कि सैकड़ों अंकतालिका भर्ती के लिए ही पिछले महीनों में जारी हुई है। वहीं विभाग की मंत्री ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा था कि किसी भी अपात्र अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा।
2010 में लगी थी रोक
एनसीटीई ने एनटीटी कोर्स को तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के लिए अमान्य करार देते हुए 2010 में यह कहा था कि केंद्र स्तर पर इसे मान्यता नहीं दी जाएगी, राज्य चाहे तो अपने स्तर पर एनटीटी का कोर्स करा सकते है। लेकिन राजस्थान सरकार ने भी वर्ष 2010 में ही एनटीटी कोर्स कराने वाले संस्थानों की मान्यता वापस ले ली थी। तब से राज्य में एनटीटी की परीक्षा भी बंद है।
पिछली सरकार ने बनाया था कैडर
पिछली कांग्रेस सरकार में कोर्स किए हुए अभ्यर्थियों के आंदोलन को देखते हुए तत्कलीन कांग्रेस सरकार 2011-12 में महिला बाल विकास विभाग के अधीन शाला पूर्व प्राथमिक अध्यापक का कैडर बनाया था। इस समय 500 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। यह परीक्षा भी चार साल तक उलझी रही थी।
1310 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा
प्रदेश में एनटीटी डिग्रीधारी अभ्यर्थियों के लिए 1310 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा होगी। एनटीटी अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश में कुल 2754 अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त पात्र कॉलेजों से एनटीटी की डिग्री ले रखी है। जबकि इनमें से करीब 1300 अभ्यर्थी ऐसे है जिनकी नौकरी लग चुकी है। यानि अब प्रदेश में केवल 1400 अभ्यर्थी ऐसे है जिनके पास एनटीटी की डिग्री है। इसके बाद एनटीटी की आखिरी भर्ती में केवल 1400 अभ्यर्थी ही परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते थे, क्योंकि उन्हीं के पास एनटीटी की डिग्री है। जबकि इस परीक्षा के लिए 24268 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।



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