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आखें नम, फिर भी है गर्व, अब बदला लेने का वक्त

खेतड़ी(झुंझुनूं). जम्मू कश्मीर के पुलवामा के पास पींगलाना में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के टीबा गांव का लाडले शहीद हवलदार श्योराम गुर्जर के भाई रूपचन्द ने बताया कि जब वे दूसरी-तीसरी कक्षा में थे। तभी पिता बालुराम गुर्जर का साया उठ गया था। मां सारली देवी ने ही उन्हे पाल पौसकर इस लायक बनाया। शहीद श्योराम वर्ष 2000 में भारतीय सेना की 20 ग्रनेडियर में भर्ती हुए थे वर्तमान में पुलमावा में 55 आरआर में ड्यूटी पर कार्यरत थे। श्योराम की शादी वर्ष 2004 में डूमोली के हलवदार प्रकाश गुर्जर की पुत्री सुनीता के साथ हुई थी।

 

आखें नम, फिर भी है गर्व
उपखंड मुख्यालय से करीब 24 किलोमीटर दूर हरियाणा की सीमा पर छोटे से गांव टीबा की आज हर आंख नम है तो सीना गर्व से फूल भी रहा है। यहां के लाडले को खोने का गम तो जीवन भर सालता रहेगा, लेकिन गर्व इस बात का भी है उसने देश के लिए अपने प्राणों की आहूतियां दे दी। वह जब दिसम्बर में छुट्टियों में आया था तब कहकर गया था, कभी पीठ नहीं दिखाऊंगा। देश के लिए जान देने से पहले दुश्मनों का सफाया जरूर करूंगा। बिना दुश्मन को मारे वह प्राणन्योछावर नहीं करेगा।

आज उसकी यही बात हर किसी की जुबां पर छाई हुई है। श्योराम गुर्जर के सहपाठी रहे हरिशरण गुप्ता ने बताया, श्योराम गुर्जर मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। वे जब भी छुट्टी पर आते थे सभी से मिलकर जाते थे। श्योराम गुर्जर ने प्राथमिक कक्षा की पढाई टीबा के राजकीय स्कूल से तथा 12 तक की पढाई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बसई से की। बीए स्वयंपाठी छात्र के रूप में किया। श्योराम आखिरी बार दिसम्बर में आए थे। तब कहा कि वह अब संतान के जन्म पर आएगा। वह संतान के जन्मने से पहले आ तो गया, लेकिन तिरंगे में लिपटकर।

सेना भर्ती के टिप्स बताते थे
टीबा गांव के कार्यरत सैनिक जब भी छुट्टी आते हैं स्थानीय नवयुवकों को भर्ती की तैयारी करवाते हैं। प्रतिवर्ष खेल प्रतियोगिता भी करवाते हैं जिसमे क्षेत्र की प्रतिभाएं आगे आ सके। दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह में हुई खेल प्रतियोगिता में भी श्योराम ने सहयोग किया था। श्योराम युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने के साथ ट्रेनिंग भी देता था।
-रामचन्द्र गुर्जर,ग्रामीण

 

अब बदला लेने का वक्त
श्योराम गुर्जर गांव का होनहार युवक था। जब भी छुट्टी आता था सभी से घुल मिलकर रहता था। प्रधानमंत्री से आग्रह है कि पाकिस्तान को आर-पार की लड़ाई कर सबक सिखाए। अब बदला लेने का वक्ता है।
-नारायण सिंह अवाना,प्रदेश अध्यक्ष वन श्रमिक संघ

 

शहीद के ससुराल डूमोली में भी नहीं जले चूल्हे
सिंघाना. शहीद श्योराम गुर्जर का डूमोली खुर्द गांव में ससुराल है। श्योराम की शहादत की सूचना पर डूमोली खुर्द गंाव में सन्नाटा छा गया।गांव के लोगों की आंखें नम हो गई। किसी घर में चूल्हे नहीं जले। डूमोली खुर्द निवासी ओमप्रकाश गुर्जर फौज से सेवानिवृत हुए थे। जिनका दो साल पहले निधन हो गया। ओमप्रकाश गुर्जर के चार संतान है। जिसमें दो बेटे व दो बेटियां है।

सबसे बड़ा बेटा विकास नेवी में है। दूसरे नम्बर का बेटा उमंग आर्मी की तैयारी कर रहा है। तीसरे नम्बर की बेटी सुनीता व चौथे नम्बर की बेटी अनिता दोनों सगी बहनों की शादी टीबा(खेतड़ी) निवासी श्योराम गुर्जर व रूपचन्द गुर्जर के साथ हुई। वीरांगना सुनीता देवी बीए, बीएड है।



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