आबूरोड. जिले के कुछ बांधों को छोड़कर जिले के सभी बांध तालाब सूखने लगे है। जिस बांध में पानी है वो भी मात्र दस से पप्द्रह दिन तक ही रहेगा। ऐसे में इस वर्ष गर्मी में सूखे तालाबों के कारण जलस्तर लगातार घट रहा है, ऐसे में इस बार जलापूर्ति में भी जलदाय विभाग को सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि जलदाय विभाग सिरोही के अगणोर, कमेरी तथा धांता बांध के जलस्त्रोतों से ही पानी लेता है, लेकिन वो भी अबकी बार पूरी तरह से खाली है। सभी बांधों के पैदें दिखने लगे है, ऐसे में सिरोही में तो ७२ घंटे में पानी दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जिले के बांधों में पानी रहने के कारण आस-पास के कुए, बावड़ी, जलस्त्रोतों में पानी पड़ा रहता है, जिससे पेयजल सप्लाई में परेशानी नहीं आती है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में मोटरपंप, हैंडपंप और कुओं से पानी की आपूर्ति होती है। जिले में बांधों में भरपूर पानी होने के कारण भू-जलस्तर अच्छा रहता था। इस साल बारिश नाम मात्र की होने के कारण बांधों में पानी नहीं होने से भू-जलस्तर भी तेजी से घट गया, जो गर्मी के मौसम के लिए खतरे का संकेत है। जिले की पांच पंचायत समितियों के पास ३०, जल संसाधन विभाग के पास ३० तथा जवाई परियोजना के पास छह छोटे-बड़े बांध हैं।
इन बांधों में है थोड़ा पानी
कुई सांगणा में १.२०, चनार में ५.३०, बगेरी में २.२०, सरुपसागर में २.३५, वालोरिया में ६.१०, ५.५०, कादम्बरी में १.३०, भूला में ४.१० एवं वेस्ट बनास में ०.९० मीटर पानी है। हालांकि यह पानी नाम मात्र का है, सबसे ज्यादा वालोरिया में है।
यहा खोदे ट्यूब वैल
बांधों में पानी नहीं होने के कारण जलदाय विभाग ने गर्मी की शुरूआती दौर में ही तैयारी शुरु कर दी है। विभाग की ओर से आबूरोड के आकराभट्टा तथा गांधीनगर में एक-एक, सिरोही के अणगौर कमेरी के पास तीन, पिण्डवाड़ा में पांच, भावरी में ३ ट्यूब वैल खुदवाए है, ताकि नियमित पानी सप्लाई हो सके।
पाण के लिए भी नहीं मिला पानी
-इस साल अल्पवर्षा के चलते अधिकांश तालाब भर नहीं पाए हैं। इसको लेकर दीपावली को दी जाने वाली पाण भी नहीं दी थी, बांध खाली रहने के कारण अब गर्मी में परेशान हो सकती है।
- प्रकाशचन्द्र, जल संसाधन विभाग सिरोही।
ट्यूब वैल खुदवाए...
बाधों के भरे रहने से विभाग के कुओं का जलस्तर बढ़ा रहता था, लेकिन अब बांध खाली होने के कारण पेयजल सप्लाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिरोही समेत अन्य स्थानों पर ट्यूब वैल खुदवाएं है।
- राजेन्द्र पुरोहित अधीक्षण अभियंता जलदाय विभाग।





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